26 दिन में तीन धमकियों से कश्मीरी पंडितों में बढ़ा डर, नाम-पता और गाड़ी नंबर का जिक्र
कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों को लगातार मिल रही धमकियों ने एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। महज 26 दिनों के भीतर तीन धमकियां मिलने की बात सामने आई है। धमकी भरे पत्रों में कथित तौर पर लोगों के नाम, पते और वाहनों के नंबर तक का उल्लेख किया गया है।
इन धमकियों के बाद संबंधित परिवारों में डर का माहौल है। कई लोगों के लिए घर से बाहर निकलना भी चिंता का कारण बन गया है। लंबे समय से सामान्य जीवन की उम्मीद कर रहे कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच ऐसी घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धमकी भरे पत्रों में व्यक्तिगत जानकारी का जिक्र
रिपोर्ट के मुताबिक धमकी भरे पत्रों में केवल सामान्य चेतावनी नहीं बल्कि लोगों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। नाम, पता और गाड़ी नंबर जैसी जानकारियों के सामने आने से डर और ज्यादा बढ़ गया है।
ऐसी स्थिति में लोगों को आशंका है कि धमकी देने वालों के पास उनकी गतिविधियों और पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद हो सकती है। यही वजह है कि कई परिवार अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।
घर से निकलने को लेकर भी बढ़ा डर
धमकियों के बाद प्रभावित लोगों के बीच बाहर निकलने को लेकर भय का माहौल है। सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
सरकारी कर्मचारियों और घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडितों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। कुछ मामलों में घर से काम करने यानी Work From Home (WFH) की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा सामने आई है।
कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा फिर मुद्दा
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से कश्मीरी पंडितों और अन्य विस्थापित समुदायों के पुनर्वास तथा रोजगार से जुड़े कई प्रयास किए गए हैं।
लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली धमकियां और सुरक्षा संबंधी घटनाएं इस प्रक्रिया के सामने चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में समुदाय के लोगों की सुरक्षा और भरोसा कायम रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
सरकारी कर्मचारियों में भी चिंता
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को सरकारी रोजगार दिए गए हैं। इन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पहले भी बहस होती रही है।
नई धमकियों के बीच सरकारी कर्मचारियों के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर सामान्य कामकाज जारी रखना और दूसरी ओर कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा देना।



