ग्राम कालवा में चल रही संगीतमय श्री करणी माता की दिव्य कथा का विराम उनके 151 वर्ष की आयु में महापरीनिर्वाण उत्सव के साथ हुआ। कथा वाचक डाक्टर करणी प्रताप सिंह ने व्यास पीठ से कथा का वाचन करते हुए कहा कि करणी माता का जन्म चारण परिवार में हुआ और उन्हें माँ जगदम्बा का अवतार माना जाता है।
डाक्टर करणी प्रताप सिंह ने बताया कि करणी माता ने अपने जीवन में गायों की सेवा, समाज सुधार और निर्बलों की रक्षा में समर्पित जीवन जिया। बीकानेर और जोधपुर रियासतों की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही। देशनोक में उनका प्रसिद्ध ‘चूहों वाली माता’ मंदिर उनकी कृपा का प्रतीक है।
कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति, निःस्वार्थ सेवा, नारी शक्ति और संस्कारों का पालन कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। कथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और गो-सेवा के प्रति जागरूक करती है।
इस अवसर पर मातृशक्ति के सम्मान और आत्मरक्षा जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लक्षिता राठौड़ ने तलवारबाजी प्रदर्शन किया। डाक्टर करणी प्रताप सिंह ने कहा कि यह प्रदर्शन नारी शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक है। सरपंच दिलीप सिंह ने भी महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की महत्ता पर जोर दिया।
कथा के दौरान किन्नू बन्ना के भजन उपस्थित भक्तों का मन मोहने वाले रहे। कार्यक्रम में सैंकड़ों श्रद्धालु भक्त मौजूद थे, जिन्होंने कथा और प्रदर्शन का गहरा आनंद लिया।
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