जंतर-मंतर प्रदर्शन को मिला तमिल अभिनेत्री ज्योतिका का समर्थन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग
नई दिल्ली।तमिल फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री ज्योतिका ने देश में चल रहे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और CJP (Collective Justice Platform) के आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई और कहा कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
ज्योतिका का यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET परीक्षा, नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को लेकर देशभर में छात्र संगठन और सामाजिक संस्थाएं लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
सोशल मीडिया पर साझा किया समर्थन
अभिनेत्री ज्योतिका ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पोस्ट साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल केवल छात्रों का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश के भविष्य का प्रश्न हैं। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साहस की सराहना करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया।
ज्योतिका ने अपने संदेश में कहा कि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
जंतर-मंतर पर क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि NEET परीक्षा प्रक्रिया, नई शिक्षा नीति और शिक्षा प्रणाली में कई ऐसी कमियां हैं, जिनका असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजने के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
CJP ने भी आंदोलन को दिया समर्थन
इस आंदोलन को CJP (Collective Justice Platform) सहित कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए हैं। उन्होंने सरकार से संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की।




