JPSC-JSSC विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर भड़के छात्र, 24 जिलों में CM हेमंत सोरेन के पुतले का ऐलान
रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा JPSC-JSSC विवाद एक बार फिर गरमा गया है। झारखंड हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने से जुड़े सरकारी आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले से करीब 450 अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्रों का गुस्सा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच से जुड़े छात्र नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को दूर करने और उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसी भरोसे के बाद आंदोलन को कुछ समय के लिए रोकने की बात सामने आई थी।
लेकिन अब अदालत में सरकार का पक्ष सामने आने और नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक लगने के बाद छात्र नेताओं का कहना है कि उन्हें सरकार की कार्रवाई से निराशा हुई है। कई छात्र नेताओं ने इसे अपने आंदोलन के लिए नया मोड़ बताया है।
24 जिलों में विरोध का ऐलान
छात्रों की ओर से राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इससे पहले भी छात्र संगठनों ने रांची में प्रदर्शन और पुतला दहन किया था।
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन पिछले कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसी मांगें उठा रहे हैं।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL और JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना शामिल है।
छात्रों का कहना है कि मामला सिर्फ कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड के हजारों नौकरी अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है। आंदोलनकारी संगठन लगातार सरकार से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले छात्रों ने सरकार को अल्टीमेटम भी दिया था और मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी थी।



