जोधपुर डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति के अधीक्षण अभियंता सहित अभियंताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निजीकरण को जनहित और राज्यहित के खिलाफ बताया गया है।
समिति ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया से कर्मचारियों और उपभोक्ताओं में भारी असंतोष व्याप्त है। ओडिशा सहित अन्य राज्यों के अनुभवों का हवाला देते हुए बताया गया कि निजीकरण से सेवा में सुधार के बजाय समस्याएं बढ़ी हैं।
इसके साथ ही राजस्थान के कोटा, बीकानेर और भरतपुर में लागू फ्रेंचाइजी मॉडल को भी विफल बताते हुए इसे चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि डिस्कॉम का घाटा कर्मचारियों की कार्यशैली के कारण नहीं, बल्कि नीतिगत खामियों और ठेका प्रथा के कारण हुआ है।
कर्मचारियों ने दावा किया कि उनके प्रयासों से AT&C लॉस में उल्लेखनीय कमी आई है और हाल के वर्षों में वित्तीय सुधार भी दर्ज किए गए हैं। संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत प्राप्त करीब 6000 करोड़ रुपये को सार्वजनिक धन बताते हुए इसे निजी कंपनियों को सौंपने का विरोध किया।
समिति ने मांग की कि इस राशि का उपयोग केवल सरकारी ढांचे को मजबूत करने में किया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री से निजीकरण प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने, नियमित भर्तियां करने, ठेका प्रथा समाप्त करने और फ्रेंचाइजी मॉडल की जांच कराने की मांग रखी गई।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशभर में आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और असहयोग जैसे कदम उठाए जाएंगे।
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