स्कूल बस हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
जयपुर जिले के जोबनेर में स्कूल बस हादसे के दो दिन बाद गंभीर रूप से घायल छात्रा की मौत हो गई। 15 वर्षीय लक्षिता कुमावत ने रविवार सुबह जयपुर के SMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
छात्रा की मौत की खबर सामने आते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने निजी स्कूलों की चार बसों को रोककर प्रदर्शन किया और स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।
42 सीटर बस में 92 बच्चों का दावा
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कुछ स्कूल बसों को रोककर उनकी जांच की। इसी दौरान एक 42 सीटर बस में 92 बच्चों के सवार होने की बात सामने आई।
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को बस में बैठाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। लोगों का आरोप है कि स्कूल बसों में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
बस पर नहीं लिखा था ‘बाल वाहिनी’
जांच के दौरान बस पर अनिवार्य रूप से लिखा जाने वाला ‘बाल वाहिनी’ भी नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन और परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाए।
लोगों की मांग है कि स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाली बसों की नियमित जांच हो और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
8 अगस्त को हुआ था दर्दनाक हादसा
दरअसल, 8 अगस्त को जोबनेर में एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो सामने से आ रही स्कूल बस से टकरा गई थी। हादसे में 18 बच्चे घायल हुए थे।
हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल लक्षिता कुमावत को इलाज के लिए जयपुर के SMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था।
इलाज के दौरान छात्रा ने तोड़ा दम
लक्षिता के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ था। इसके अलावा कमर में गंभीर चोट लगने के कारण लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टर छात्रा के ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम के बाद छात्रा का शव परिजनों को सौंप दिया गया।
स्कूल बसों की सुरक्षा पर उठे सवाल
लक्षिता की मौत के बाद सामने आए ओवरलोडिंग के मामले ने स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाना उनकी जान को खतरे में डालना है। लोगों ने प्रशासन से सभी निजी स्कूल बसों की जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।




