झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर बढ़ा बवाल, अनशन के बीच CID की 18 ठिकानों पर रेड, पूर्व अध्यक्ष से 7 घंटे पूछताछ
रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्य में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो के आमरण अनशन का तीसरा दिन भी जारी रहा, जबकि हजारों छात्र रांची समेत कई जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई जाती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, पूरे मामले की CBI जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है।
इसी बीच जांच एजेंसी CID ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में 18 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि जब्त किए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मामले की परतें खोलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए JPSC के पूर्व अध्यक्ष से करीब सात घंटे तक लंबी पूछताछ भी की गई। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक पूछताछ से जुड़े किसी निष्कर्ष या बरामदगी का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता का सवाल है। छात्रों का आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो योग्य अभ्यर्थियों का भरोसा सरकारी संस्थाओं से पूरी तरह उठ जाएगा। कई छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है, जिससे सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।




