झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के कारण सुर्खियों में है, जहां एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय की संयुक्त टीम ने पांच माह के एक मासूम बच्चे की जटिल एंडोस्कोपी सर्जरी कर उसकी जान बचाई। यह सफलता न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह मामला मध्यप्रदेश के सुसनेर क्षेत्र के कंवरखेड़ी गांव से जुड़ा है, जहां पैरा मिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी माह में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के कुछ समय बाद ही परिवार ने देखा कि एक बच्चा सामान्य रूप से अपनी गर्दन संभाल नहीं पा रहा है, जिससे परिजन चिंतित हो गए।
कई जगह उपचार कराने के बाद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो परिवार बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तुरंत बच्चे को भर्ती कर विस्तृत जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बच्चा हाइड्रोसिफलस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
बच्चे की उम्र मात्र पांच माह होने के कारण उसका इलाज अत्यंत जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति यानी एंडोस्कोपी सर्जरी करने का निर्णय लिया। यह सर्जरी बेहद नाजुक थी क्योंकि छोटे शिशु के मस्तिष्क में बेहद सीमित स्थान पर कार्य करना था।
इस जटिल ऑपरेशन में न्यूरो सर्जरी विभाग के साथ एनेस्थीसिया विभाग और बाल रोग विभाग की टीम ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टरों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और टीमवर्क के कारण यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हो सकी।
ऑपरेशन के बाद बच्चे की लगातार निगरानी की गई और धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार आने लगा। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। यह सफलता मेडिकल कॉलेज की आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की दक्षता को दर्शाती है।
इस पूरे इलाज को आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क किया गया, जिससे परिवार को आर्थिक बोझ से राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बड़े शहरों में महंगे इलाज को लेकर परेशान थे, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने उनके बच्चे को नया जीवन दिया।




