वार्षिक परीक्षा के नाम पर मानसिक दबाव का आरोप
जौनपुर जिले के मड़ियाहूं क्षेत्र स्थित सेंट जेवियर्स इंटर कॉलेज, काजीपुर में वार्षिक परीक्षा के टाइम टेबल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रशासन द्वारा जारी परीक्षा कार्यक्रम में नियमों की अनदेखी की गई है, जिससे छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।मामला विशेष रूप से कक्षा 6, 7, 8 और 9 के छात्रों से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को अलग-अलग सेक्शन के आधार पर विभाजित कर एक ही दिन में कई परीक्षाएं रखी जा रही हैं। इससे बच्चों को तीन से चार विषयों की तैयारी एक साथ करनी पड़ रही है, जो उनके लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन गया है।
CBSE नियमों के उल्लंघन का आरोप
अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय सीबीएसई (CBSE) के दिशा-निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल न देकर बच्चों पर अधिक शैक्षणिक दबाव डाला जा रहा है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कम उम्र के छात्रों के लिए संतुलित और व्यवस्थित परीक्षा शेड्यूल आवश्यक होता है, ताकि वे बिना तनाव के अपनी तैयारी कर सकें। यदि एक ही दिन में कई कठिन विषयों की परीक्षा रखी जाती है, तो इससे छात्रों में घबराहट, तनाव और नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान अत्यधिक दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अभिभावकों ने आशंका जताई है कि लगातार बढ़ते शैक्षणिक दबाव के कारण बच्चे अवसाद (डिप्रेशन) जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में परीक्षा तनाव के कारण छात्रों में चिंता और मानसिक परेशानी के मामले बढ़े हैं। ऐसे में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह परीक्षा कार्यक्रम बनाते समय बच्चों के मानसिक संतुलन का ध्यान रखे।
शिक्षा विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग
अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित संस्थान के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि बच्चों के हित को सर्वोपरि रखते हुए परीक्षा शेड्यूल में आवश्यक संशोधन कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव न पड़े।
स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार




