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जन्माष्टमी पर निशीथ काल में होगी विशेष पूजा

जन्माष्टमी 2026 पर ग्रहों का दुर्लभ महासंयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चार राशियों के लिए समय शुभ रहेगा।

Enews Bharat31 August 2026
जन्माष्टमी पर निशीथ काल में होगी विशेष पूजा

जन्माष्टमी 2026 पर बनेगा दुर्लभ ग्रह संयोग, चार राशियों का भाग्योदय

Shri Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है और इस दिन देशभर में भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना, व्रत और विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस बार जन्माष्टमी धार्मिक महत्व के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास बताई जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन कई ग्रह अपनी मजबूत या अनुकूल स्थिति में रहने वाले हैं, जिसे कुछ ज्योतिषी दुर्लभ ग्रह संयोग के रूप में देख रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में, गुरु कर्क राशि में, सूर्य सिंह राशि में और शुक्र तुला राशि में स्थित बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बुध की स्थिति को भी शुभ बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन ग्रहों की स्थिति का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। इनमें वृषभ, कर्क, सिंह और तुला राशि को विशेष रूप से लाभ मिलने के संकेत बताए गए हैं।

4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था।

इसी वजह से जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद पूजा-अर्चना करके व्रत खोलते हैं।

पंचांग संबंधी विवरणों के अनुसार, 2026 में अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात से शुरू होकर 5 सितंबर तक रहने की बात कही गई है। रोहिणी नक्षत्र का भी जन्माष्टमी के आसपास विशेष संयोग बताया गया है।

जन्माष्टमी पर ग्रहों की स्थिति क्यों है खास?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर कई प्रमुख ग्रह ऐसी राशियों में रहने वाले हैं जिन्हें ज्योतिष में मजबूत स्थिति माना जाता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे, जबकि गुरु कर्क राशि में उच्च स्थिति में बताए जा रहे हैं। सूर्य अपनी राशि सिंह में और शुक्र अपनी राशि तुला में स्थित रहेंगे। बुध को भी अनुकूल स्थिति में बताया गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब कई ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।

मंगल और शुक्र से बनेगा नवपंचम योग

रिपोर्ट में मंगल और शुक्र के बीच बनने वाले नवपंचम राजयोग का भी उल्लेख किया गया है। ज्योतिष में नवपंचम योग को शुभ योगों में गिना जाता है।

मान्यता है कि ऐसे योग आर्थिक स्थिति, सुख-सुविधाओं और उपलब्धियों से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। हालांकि, किसी भी योग का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग माना जाता है।

वृषभ राशि: धन लाभ के बनेंगे योग

वृषभ राशि वालों के लिए जन्माष्टमी का दिन विशेष रूप से शुभ बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा आपकी राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे।

इससे आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता में बढ़ोतरी हो सकती है। कार्यक्षेत्र में लंबे समय से अटके काम पूरे होने के संकेत हैं।

आर्थिक मामलों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। धन प्राप्ति के नए रास्ते खुलने और निवेश से जुड़े मामलों में अवसर मिलने की संभावना बताई जा रही है।

हालांकि, किसी भी निवेश का फैसला केवल राशिफल देखकर नहीं लेना चाहिए।

कर्क राशि: करियर में मिल सकती है सफलता

कर्क राशि वालों के लिए भी जन्माष्टमी का समय लाभकारी बताया जा रहा है। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा की स्थिति और गुरु के कर्क राशि में होने को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी का अवसर मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने के संकेत हैं।

परिवार में किसी शुभ या धार्मिक आयोजन की योजना बन सकती है। घर का माहौल सकारात्मक रहने की संभावना है।

सिंह राशि: बढ़ेगा आत्मविश्वास और मान-सम्मान

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य की स्थिति खास बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार जन्माष्टमी पर सूर्य अपनी राशि सिंह में रहेंगे।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने के संकेत हैं।

सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल बताया गया है। पैतृक संपत्ति या अचानक आर्थिक लाभ से जुड़े अवसर मिलने की संभावना भी जताई गई है।

तुला राशि: आर्थिक स्थिति हो सकती है मजबूत

तुला राशि वालों के लिए शुक्र की स्थिति को खास माना जा रहा है। शुक्र तुला राशि में अपनी राशि में रहने वाले हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इससे भौतिक सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कारोबारियों को बड़ी डील मिलने या किसी महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर के सामने आने की संभावना है।

कला, मीडिया, फैशन और क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अच्छा बताया जा रहा है।

जन्माष्टमी पर करें भगवान कृष्ण की विशेष पूजा

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जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा करने की परंपरा है। भक्त भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, पंजीरी और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं।

पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण को तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है।

रिपोर्ट में जन्माष्टमी के अवसर पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र के जाप का भी सुझाव दिया गया है।

जन्माष्टमी पर निशीथ काल में होती है विशेष पूजा

जन्माष्टमी की सबसे महत्वपूर्ण पूजा मध्यरात्रि के आसपास की जाती है। इसे निशीथ काल की पूजा कहा जाता है।

2026 के पंचांग विवरण के अनुसार 4 सितंबर की रात निशीथ पूजा का समय लगभग 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक बताया गया है। मध्यरात्रि के आसपास भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा।

हालांकि, पूजा का सही समय स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी की रहेगी खास रौनक

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में महाभिषेक, विशेष श्रृंगार और दर्शन की व्यवस्था रहती है।

मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में विशेष पूजा और उत्सव का आयोजन होता है। इसके बाद अगले दिन नंदोत्सव मनाने की परंपरा है।

देश के अन्य हिस्सों में भी भक्त घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण की झांकी सजाकर जन्माष्टमी मनाते हैं।

क्या सच में सदियों बाद बना है ऐसा महासंयोग?

जन्माष्टमी 2026 को लेकर “सदियों बाद” और “दुर्लभ महासंयोग” जैसे दावे चर्चा में हैं। हालांकि, ऐसे दावों को ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं के संदर्भ में ही देखना चाहिए।

ग्रहों की स्थिति का खगोलीय तथ्य और उसका ज्योतिषीय अर्थ दो अलग बातें हैं। इसलिए इन ग्रह स्थितियों को वैज्ञानिक रूप से किसी व्यक्ति के भविष्य या आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।

ज्योतिषीय दृष्टि से इस संयोग को शुभ बताया जा रहा है, लेकिन इसके प्रभाव को निश्चित भविष्यवाणी की तरह नहीं लेना चाहिए।

इन चार राशियों के लिए खास बताया जा रहा है समय

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वृषभ, कर्क, सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए जन्माष्टमी 2026 का समय विशेष रूप से शुभ बताया गया है।

वृषभ राशि को धन और कार्यक्षेत्र में लाभ, कर्क को करियर और आर्थिक मामलों में अवसर, सिंह को मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि तथा तुला को आर्थिक और व्यावसायिक लाभ मिलने के संकेत बताए गए हैं।

फिर भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योतिषीय भविष्यवाणी सामान्य राशि के आधार पर होती है। किसी व्यक्ति की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उसकी जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान के आधार पर कुंडली का विश्लेषण किया जाता है।

जन्माष्टमी 2026 का धार्मिक महत्व

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं।

कई जगहों पर दही-हांडी और कृष्ण लीला जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में भगवान के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाता है।

जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भगवान कृष्ण की शिक्षाओं और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी माना जाता है।

निष्कर्ष

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 इस बार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व बेहद महत्वपूर्ण है और ज्योतिषीय गणनाओं के कारण भी इसे खास बताया जा रहा है।

ग्रहों की स्थिति को लेकर ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वृषभ, कर्क, सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रह सकता है।

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, व्रत और मंत्र जाप के साथ भक्त इस पावन पर्व को श्रद्धा और उत्साह से मनाएंगे। हालांकि, राशिफल और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए, न कि निश्चित भविष्यवाणी के रूप में।


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