17 बच्चे थे सवार, ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा; बस जलकर खाक
जैसलमेर में बच्चों से भरी एक स्कूल बस अचानक आग का गोला बन गई… बस में उस वक्त 17 मासूम सवार थे। गनीमत रही कि ड्राइवर ने समय रहते इंजन से निकलता धुआं देख लिया और तुरंत बस रोककर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अगर कुछ मिनट की भी देरी होती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।
जैसलमेर के धऊवा गांव के पास मंगलवार सुबह यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि एसएम पब्लिक स्कूल की बस पिथला गांव से बच्चों को लेकर डाबला रोड स्थित स्कूल जा रही थी। बस में करीब 17 बच्चे सवार थे। सभी बच्चे रोज की तरह स्कूल जाने के लिए बस में बैठे थे, लेकिन धऊवा गांव के पास अचानक हालात बदल गए।
गड्ढे में पहिया गिरने के बाद निकला धुआं
जानकारी के मुताबिक, सड़क पर बने एक गड्ढे में बस का अगला पहिया आने के बाद जोरदार झटका लगा। इसके कुछ ही देर बाद बस के इंजन वाले हिस्से से धुआं निकलने लगा। ड्राइवर ने धुआं देखते ही खतरा भांप लिया और बिना समय गंवाए बस को सड़क किनारे रोक दिया।
इसके बाद ड्राइवर ने बच्चों को एक-एक करके बस से बाहर निकाला। सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के कुछ ही देर बाद बस में आग तेजी से फैलने लगी।
देखते ही देखते आग की लपटों में घिरी बस
बच्चों के बस से बाहर निकलते ही आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में स्कूल बस आग की तेज लपटों से घिर गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
हालांकि, तब तक बस का अधिकांश हिस्सा जल चुका था। बच्चों के स्कूल बैग, किताबें और अन्य सामान भी आग की चपेट में आकर जल गए। हादसे के बाद मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा आग का कारण
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बस में आग लगने की संभावित वजह वायरिंग में शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी।
इस हादसे ने स्कूल बसों की सुरक्षा और उनकी नियमित जांच को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को लेकर चलने वाली बस की फिटनेस और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की नियमित जांच की गई थी या नहीं।
स्कूल प्रबंधन पर उठे सुरक्षा के सवाल
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि बस को सड़क पर उतारने से पहले उसकी तकनीकी स्थिति को कितनी गंभीरता से जांचा गया था। क्या बस की वायरिंग, इंजन और दूसरे जरूरी हिस्सों की समय पर जांच हुई थी? अगर हुई थी तो फिर ऐसी तकनीकी खराबी बस में कैसे रह गई?
राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि ड्राइवर की सूझबूझ और समय पर लिए गए फैसले से बस में मौजूद सभी 17 बच्चे सुरक्षित बच गए। अगर धुआं दिखाई देने में थोड़ी भी देर होती या बच्चों को बस से बाहर निकालने में समय लगता, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।



