जयपुर में पहली बार हुई वुमन मिडनाइट वॉक
जयपुर में बुधवार रात महिलाओं और युवतियों ने कुछ ऐसा किया, जिसने महिला सुरक्षा और आजादी को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी। जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट पर बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां जुटीं और वुमन मिडनाइट वॉक निकाली।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस आयोजन में करीब 900 से 1000 महिलाएं और लड़कियां शामिल हुईं। कुछ पुरुषों ने भी महिलाओं की सुरक्षा, बराबरी और सार्वजनिक जगहों पर उनकी स्वतंत्र आवाजाही के समर्थन में हिस्सा लिया।
हाथों में तख्तियां, उन पर सवाल
वॉक में शामिल महिलाओं के हाथों में अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियां थीं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला सवाल था—“रात किसकी? शहर किसका? आजादी किसकी?”
वॉक का मुख्य संदेश यही था कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही को सीमित करने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को ऐसा बनाया जाए, जहां वे दिन हो या रात, सुरक्षित महसूस कर सकें।
“रात हुई तो आजादी कम क्यों हो?”
वॉक के दौरान महिलाओं ने सवाल उठाया कि अगर कोई महिला रात में अपने शहर की सड़क पर निकलती है तो उसकी आजादी को समय के हिसाब से क्यों देखा जाए?
आयोजकों और प्रतिभागियों ने महिला सुरक्षा को सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी मानने के बजाय पूरे समाज की जिम्मेदारी बताया। उनका कहना था कि महिलाओं को रात में बाहर निकलने से रोकने के बजाय सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी हुए शामिल
इस वॉक में कुछ पुरुषों ने भी हिस्सा लिया। उनका संदेश था कि महिलाओं की सुरक्षा और बराबरी सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं है। समाज में बदलाव के लिए पुरुषों की भागीदारी भी जरूरी है।
वॉक में शामिल प्रतिभागियों ने सम्मान, बराबरी और सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की जरूरत पर बात की। कुछ महिलाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए।
“लड़कियों की लोकेशन नहीं, सोच बदलने की जरूरत”
आयोजन के दौरान कई नारे लगाए गए। इनमें महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और समाज की सोच पर सवाल उठाए गए।
प्रतिभागियों ने कहा कि किसी लड़की की सुरक्षा को उसके कपड़ों, बाहर निकलने के समय या उसकी लोकेशन से जोड़ने के बजाय समाज में सम्मान, सहमति और बराबरी की समझ मजबूत करने की जरूरत है।



