जयपुर के किसान सोनाराम यादव ने 10 बीघा जमीन में पॉलीहाउस और जैविक तकनीक से खीरे की खेती कर सालाना 30 लाख रुपये तक कमाई का मॉडल तैयार किया।
जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल निवासी किसान सोनाराम यादव ने यह साबित किया है कि खेती में उम्र नहीं, बल्कि नई तकनीक अपनाने का जज्बा मायने रखता है। 70 साल की उम्र में उन्होंने पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक और जैविक खेती को अपनाया है।
सोनाराम के पास कुल 10 बीघा जमीन है। इसी जमीन के करीब 4048 वर्ग मीटर हिस्से में उन्होंने तीन साल पहले पॉलीहाउस तैयार कराया। पॉलीहाउस में वे संरक्षित वातावरण के अंदर जैविक तरीके से खीरे की खेती कर रहे हैं।
उनकी खेती की सबसे खास बात यह है कि वे रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाए हुए हैं। सोनाराम के अनुसार, खेती में यूरिया का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता। फसल को स्वस्थ रखने के लिए वे जैविक घोल और सूक्ष्म जीवों का इस्तेमाल करते हैं।
15 तरह के जैविक एजेंट्स से फसल की सुरक्षा
सोनाराम यादव ने अपनी खेती में करीब 15 तरह के बायो-एजेंट्स और सूक्ष्म जीवाणुओं को शामिल किया है। इनकी मदद से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ फसल में लगने वाले कीट और रोगों को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए वे केंचुआ खाद, वर्मीवॉश, डीकंपोजर और एनपीके का इस्तेमाल करते हैं। वहीं फफूंद और कीट प्रबंधन के लिए ट्राइकोडर्मा, ब्युवेरिया बेसियाना, स्यूडोमोनास, माइकोराइजा और पिकोनिया जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाता है।
सोनाराम इन जैविक समाधानों को तैयार करने के लिए काफी हद तक अपने खेत और घर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
खारे पानी के बीच पानी बचाने का अनोखा इंतजाम
सोनाराम के क्षेत्र में भूगर्भीय पानी खारा है। ऐसे में खेती के लिए पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए खेत में तीन फार्म पौंड बनवाए हैं।
इन फार्म पौंड में पानी को संरक्षित किया जाता है। दो फार्म पौंड के पानी से पूरे साल पॉलीहाउस में खेती की जरूरत पूरी हो जाती है। सोनाराम के अनुसार, प्रत्येक पौंड में संरक्षित पानी करीब दो साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
पॉलीहाउस में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए पौधों तक पानी पहुंचाया जाता है। इससे खेत में पानी की बर्बादी कम होती है और जरूरत के मुताबिक पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचता है।
90 दिन में 40 टन तक खीरे का उत्पादन
सोनाराम यादव की जैविक पॉलीहाउस खेती का सबसे बड़ा आकर्षण इसका उत्पादन और इससे होने वाली आय है। करीब 90 दिनों में वे लगभग 40 टन तक जैविक खीरे का उत्पादन लेने का दावा करते हैं।
एक फसल तैयार करने में करीब 1.20 लाख रुपये की लागत आती है। इसके बदले एक फसल से करीब 15 लाख रुपये तक की आय हो सकती है। साल में दो बार फसल लेने पर वे खीरे की खेती से करीब 20 से 30 लाख रुपये तक सालाना कमाई कर रहे हैं।
यह मॉडल खास तौर पर उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो कम जमीन में अधिक आमदनी हासिल करने के विकल्प तलाश रहे हैं।



