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जयपुर के किसान ने बकरी के दूध से बनाया अनोखा बिजनेस

जयपुर के संदीप मीणा ने पांच बकरियों से शुरुआत कर बकरी के दूध से घी, साबुन और पाउडर बनाने का कारोबार खड़ा किया, टर्नओवर 18 लाख पार पहुंचा।

enews bharat9 October 2026
जयपुर के किसान ने बकरी के दूध से बनाया अनोखा बिजनेस

5 बकरियों से शुरू किया कारोबार, आज 18 लाख से ज्यादा टर्नओवर

क्या आपने कभी सोचा है कि बकरी के दूध से घी और साबुन भी बनाया जा सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन राजस्थान के एक युवा किसान ने इसी आइडिया को अपने कारोबार की पहचान बना लिया। जहां ज्यादातर लोग बकरी के दूध को सिर्फ दूध के रूप में देखते हैं, वहीं जयपुर के संदीप मीणा ने इससे अलग-अलग प्रोडक्ट बनाकर बाजार में अपनी जगह बनाई है। खास बात यह है कि उनकी शुरुआत महज पांच बकरियों से हुई थी और आज उनके कारोबार का टर्नओवर 18 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है।

पांच बकरियों से शुरू हुआ सफर

यह कहानी जयपुर के पास जोबनेर क्षेत्र के डूंगरीकलां गांव के रहने वाले 25 वर्षीय संदीप कुमार मीणा की है। संदीप खेती और बकरी पालन के साथ अपना स्टार्टअप भी चला रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने किसी बड़े निवेश या बड़े कारखाने से नहीं, बल्कि घर पर मौजूद कुछ बकरियों से शुरुआत की।

रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप के परिवार पर कोरोनाकाल में मुश्किलों का दौर आया। उनके पिता जीवन राम मीणा का निधन हो गया था। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नौकरी को लेकर भी परेशानी खड़ी हो गई। ऐसे समय में संदीप ने खुद का काम शुरू करने के बारे में सोचा और अपने आसपास मौजूद संसाधनों को ही कारोबार का आधार बनाया।

उनके घर पर उस समय करीब पांच बकरियां थीं। आसपास के गांवों में भी कई परिवार बकरी पालन करते थे। संदीप ने इसी काम में एक नया अवसर तलाशा।

बकरी के दूध की मांग ने दिया नया आइडिया

संदीप ने देखा कि कोरोना के दौरान बकरी के दूध को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही थी। इसी से उन्हें बकरी के दूध का कारोबार शुरू करने का आइडिया आया।

शुरुआत में उन्होंने जयपुर के चित्रकूट स्टेडियम के पास लगने वाले ऑर्गेनिक मार्केट में दूध की स्टॉल लगाई। यहां उन्होंने करीब 250 रुपये प्रति लीटर की दर से बकरी का दूध बेचना शुरू किया। इस दौरान उन्हें ग्राहकों से बातचीत करने, बाजार की जरूरत समझने और अपने उत्पाद को बेचने का अनुभव मिला।

लेकिन इस कारोबार में एक चुनौती भी थी। बकरी का दूध महंगा होने के कारण हर ग्राहक इसे नियमित रूप से खरीदने के लिए तैयार नहीं था। ऐसे में संदीप ने सोचा कि अगर दूध से दूसरे उत्पाद बनाए जाएं, तो कारोबार को आगे बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

यहीं से उनके स्टार्टअप की दिशा बदलने लगी।

दूध से घी, साबुन और पाउडर तक पहुंचा कारोबार

संदीप ने केवल दूध बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने बकरी के दूध से घी, साबुन और पाउडर जैसे उत्पाद तैयार करके बेचने की दिशा में काम शुरू किया।

इस बदलाव के पीछे सोच साफ थी—अगर ग्राहक सीधे दूध खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, तो उन्हें उसी दूध से बने दूसरे उत्पादों के विकल्प दिए जाएं।

हालांकि, शुरुआत में उनके सामने प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के साथ काम आगे बढ़ाया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने थोक में दूध इकट्ठा करके पाउडर तैयार करने का काम शुरू किया और धीरे-धीरे अपने कारोबार को व्यवस्थित किया।

इस तरह संदीप ने पारंपरिक बकरी पालन को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के कारोबार में बदलने की कोशिश की। यानी केवल कच्चा उत्पाद बेचने के बजाय उससे कई तरह के उत्पाद तैयार करके बाजार तक पहुंचाना।

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ऑनलाइन मार्केटिंग ने बढ़ाया कारोबार

आज के दौर में अच्छा उत्पाद बनाना ही काफी नहीं है। उसे सही ग्राहकों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। संदीप ने इस बात को समझा और ऑनलाइन मार्केटिंग की ओर कदम बढ़ाया।

उन्होंने अपने उत्पादों को ऑनलाइन बाजार के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाने पर काम किया। उनके स्टार्टअप का नाम Goatveda बताया गया है। धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ा और दूसरे किसानों को भी इस काम से जोड़ने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप के साथ करीब 25 किसान जुड़े हुए हैं। इससे उनके कारोबार का दायरा केवल उनके अपने खेत या बकरियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दूसरे पशुपालकों के लिए भी अवसर तैयार हुए।

संदीप की मां कमला भी इस काम में उनका सहयोग करती हैं। परिवार के सहयोग और बाजार को समझने की कोशिशों के साथ उनका स्टार्टअप आगे बढ़ता गया।

18 लाख रुपये से ज्यादा पहुंचा टर्नओवर

पांच बकरियों से शुरू हुआ यह सफर आज एक स्टार्टअप का रूप ले चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, संदीप की कंपनी का टर्नओवर 18 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच गया है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि टर्नओवर और शुद्ध मुनाफा अलग-अलग होते हैं। टर्नओवर कारोबार की कुल बिक्री या राजस्व को दर्शाता है, जबकि मुनाफा खर्च निकालने के बाद बचने वाली रकम होती है। इसलिए 18 लाख रुपये से ज्यादा के टर्नओवर का मतलब यह नहीं है कि पूरी रकम संदीप की कमाई या बचत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबार को आगे बढ़ाने के बाद संदीप ने वर्ष 2025 में अपनी नौकरी छोड़कर स्टार्टअप पर ध्यान देना शुरू किया। यह कदम दिखाता है कि उन्होंने अपने काम को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने और उसे व्यवसाय के रूप में विकसित करने की कोशिश की।

किसानों और युवाओं के लिए क्या है सीख?

संदीप मीणा की कहानी उन युवाओं और किसानों के लिए एक उदाहरण है, जो गांव में रहकर अपना काम शुरू करना चाहते हैं। इस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ बकरी के दूध से घी या साबुन बनाना नहीं है, बल्कि किसी स्थानीय संसाधन में कारोबार का अवसर तलाशना है। हालांकि, किसी भी नए कारोबार में लागत, गुणवत्ता, ग्राहकों का भरोसा, उत्पाद की मांग और नियमों का पालन भी जरूरी होता है। हर व्यवसाय की सफलता की गारंटी नहीं होती, लेकिन बाजार की जरूरत समझकर योजनाबद्ध तरीके से काम करना महत्वपूर्ण है।


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