जयपुर में इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) राजस्थान स्टेट चैप्टर के तत्वावधान में होटल सुवेनियर, न्यू सांगानेर रोड पर “एन. आर. भसीन मेमोरियल व्याख्यान एवं पुरस्कार समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देना, उन्नत डेयरी तकनीकों पर चर्चा करना और “डेयरी विजन 2047” के तहत भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान रहे, जबकि अध्यक्षता आईडीए नॉर्थ जोन के चेयरमैन राहुल सक्सेना ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में जयपुर डेयरी के प्रबंध निदेशक मनीष फौजदार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथि स्वागत से हुई।
मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और अब “स्मार्ट डेयरी” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डेटा एनालिटिक्स और सटीक पशुपालन प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के उपयोग से पशु स्वास्थ्य निगरानी, दुग्ध गुणवत्ता परीक्षण, स्वचालित दुग्ध संग्रहण और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, संतुलित आहार, नस्ल सुधार, रोग नियंत्रण और बेहतर विपणन व्यवस्था को डेयरी क्षेत्र की प्रमुख जरूरत बताया।
ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास पर जोर देते हुए उन्होंने सौर ऊर्जा, बायोगैस और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के उपयोग को समय की मांग बताया। इससे लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य वक्ता कुलदीप शर्मा ने “भारतीय डेयरी – विजन 2047” विषय पर अपने विचार रखते हुए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, निर्यात और डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
आईडीए राजस्थान चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. करुण चंडालिया और सचिव डॉ. संतोष कुमार शर्मा ने डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान डेयरी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, उद्यमियों और विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। साथ ही दुग्ध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, जोबनेर के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी की।




