देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए MSME और स्टार्टअप्स की भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे अहम सुझाव, निवेश और नवाचार पर दिया जोर।
नई दिल्ली।देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित Jagran Badlav 2026 कार्यक्रम में उद्योग विशेषज्ञों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए MSME और स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है, लेकिन अभी भी फंडिंग, तकनीक, बाजार तक पहुंच और नियामकीय प्रक्रियाओं जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों का समाधान किए बिना इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का लाभ उठाना संभव नहीं होगा।
MSME को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। यह क्षेत्र करोड़ों लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ निर्यात और औद्योगिक उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि छोटे उद्योगों को सस्ती वित्तीय सहायता, आसान ऋण, डिजिटल तकनीक और आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई जाए ताकि उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सके।
स्टार्टअप्स के लिए बेहतर इकोसिस्टम की जरूरत
चर्चा के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि नए उद्यमियों को केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि मेंटरशिप, रिसर्च, तकनीकी सहायता और वैश्विक बाजार तक पहुंच भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों, उद्योगों और निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय से इनोवेशन को नई दिशा मिल सकती है।
रोजगार और नवाचार पर फोकस
पैनल चर्चा में यह भी कहा गया कि यदि MSME और स्टार्टअप्स को पर्याप्त सहयोग मिले तो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीटेक और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत के पास बड़ी संभावनाएं हैं।
सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी जरूरी
विशेषज्ञों ने सरकार, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर दिया। उनका कहना था कि नीति निर्माण, कर सुधार, आसान नियम और डिजिटल प्रक्रियाएं छोटे व्यवसायों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।



