ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाए जाने के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस बीच कतर पर हुए कथित ईरानी हमले ने क्षेत्रीय संकट को और गंभीर बना दिया है। कतर ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाब देने का पूरा अधिकार है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब को लेकर पाकिस्तान ने ईरान को बेहद सख्त संदेश दिया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा और रणनीतिक संबंध रहे हैं। इसी को देखते हुए इस्लामाबाद ने संकेत दिया है कि अगर ईरान या उसके सहयोगी हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर हमला किया जाता है, तो पाकिस्तान इसे अपने खिलाफ हमला मानेगा। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण खाड़ी क्षेत्र के कई देश सीधे तौर पर खतरे के दायरे में आ गए हैं। ईरान की मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों को लेकर कतर, बहरीन, कुवैत और अन्य देशों में भी चिंता बढ़ गई है। इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और रणनीतिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिसके चलते ईरान की जवाबी कार्रवाई का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
ईरान का दावा है कि उसके हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई हैं। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है। इसी बीच लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ गई है।




