हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा दांव: 7% शुल्क प्रस्ताव से वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में बढ़ी हलचल
तेहरान। मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर 7 प्रतिशत शुल्क लगाने की मांग की है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचता है। इसी वजह से इस जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की 'ऑयल लाइफलाइन' भी कहा जाता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का नया शुल्क या प्रतिबंध पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान का कहना है कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को देखते हुए शुल्क लिया जाना उचित है। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि ईरान अपने कुछ करीबी सहयोगी देशों को इस शुल्क से छूट देने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम आधिकारिक नियम जारी नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, अमेरिका इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और यहां किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ेगी और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।




