ईरान पर अमेरिकी हमले तेज, ट्रंप की नई धमकी से मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा।
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 12वीं रात भी हवाई हमले किए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सबसे दर्दनाक कार्रवाई की चेतावनी दी है। बढ़ते घटनाक्रमों के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई हैं।
अमेरिकी सेना ने फिर किए हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति के निर्देश पर 23 जुलाई को अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे क्षेत्रीय समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को खतरा हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकर विस्फोट का दावा
इसी दौरान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक ऑयल टैंकर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। IRGC के मुताबिक घटना के बाद दो अन्य जहाज भी तत्काल वापस लौट गए। हालांकि इस दावे की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान की नई चेतावनी
IRGC ने आरोप लगाया कि संबंधित जहाज अमेरिका के निर्देश पर उस समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जहां समुद्री बारूदी सुरंगें मौजूद हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा और बिना समन्वय के गुजरने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
हूती हमले की भी रिपोर्ट
इसी बीच ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं कि यमन के पास एक सऊदी ऑयल टैंकर पर हूती विद्रोहियों की मिसाइल लगी, जिससे जहाज में आग लग गई। हालांकि इस घटना की भी अभी तक किसी स्वतंत्र या आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्गों में शामिल है। यदि यहां तनाव और बढ़ता है या समुद्री यातायात बाधित होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में




