शहबाज शरीफ ने SCO में भारत को लेकर क्या कहा?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में पानी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया की क्षमता को पूरी तरह हासिल करने के लिए स्थायी शांति जरूरी है और पानी को राजनीतिक दबाव या हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को होल्ड पर रखने का फैसला किया था, जबकि पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
SCO में शहबाज शरीफ ने पानी को क्यों बताया Lifeblood?
SCO की बैठक में बोलते हुए शहबाज शरीफ ने पानी को दक्षिण एशिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसे क्षेत्र की ‘Lifeblood’ यानी जीवनरेखा बताया।
उन्होंने कहा कि पानी लाखों लोगों की जिंदगी को बनाए रखता है, जमीन को उपजाऊ बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि पानी को राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उनका यह बयान सीधे तौर पर भारत का नाम लिए बिना सिंधु जल संधि से जुड़ा माना जा रहा है।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत-पाकिस्तान में क्या विवाद है?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी इस व्यवस्था के तहत सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के पानी के बंटवारे से संबंधित नियम तय किए गए थे।
संधि के तहत पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—का पानी मुख्य रूप से भारत के लिए निर्धारित किया गया, जबकि पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—के पानी का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के लिए निर्धारित है। हालांकि भारत को पश्चिमी नदियों पर संधि में निर्धारित शर्तों के तहत कुछ उपयोग की अनुमति भी है।
यही जल व्यवस्था पिछले कई दशकों से दोनों देशों के बीच संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि को होल्ड पर रखा
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को होल्ड पर रखने का फैसला किया था। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया, जबकि पाकिस्तान ने इसमें अपनी भूमिका से इनकार किया।
इसके बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को अपनी नीति के केंद्र में रखा, जबकि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता जाहिर की।
हेग के फैसले के बाद पाकिस्तान को मिली राहत
शहबाज शरीफ के SCO बयान से ठीक पहले एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पैनल ने सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में फैसला सुनाया। पैनल ने माना कि 1960 की संधि कानूनी रूप से प्रभावी बनी हुई है और इसे दोनों में से कोई एक देश एकतरफा तरीके से खत्म या निलंबित नहीं कर सकता।
हालांकि, भारत ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया और पैनल के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पैनल को अवैध रूप से गठित बताया और कहा कि भारत ने इसकी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
इसलिए इस फैसले को भारत और पाकिस्तान दोनों के नजरिए से समझना जरूरी है।
पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर काफी निर्भर है। देश की बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई का पानी इसी नदी प्रणाली से जुड़ा हुआ है।
यही वजह है कि पाकिस्तान में सिंधु जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, कृषि, अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन से जोड़कर देखा जाता है।
पानी की उपलब्धता में किसी भी बड़े बदलाव को पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक और सामाजिक मुद्दे के रूप में देखा जा सकता है।
शहबाज ने कहा- पानी को राजनीतिक हथियार न बनाया जाए
SCO में अपने भाषण के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक दबाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पानी से जुड़े समझौते बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान की तरफ से यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव बना हुआ है।
भारत का रुख क्या है?
भारत का रुख सिंधु जल संधि और उससे जुड़े विवाद पर पाकिस्तान के रुख से अलग है। भारत ने 2025 में पहलगाम हमले के बाद संधि को होल्ड पर रखने का निर्णय लिया था और आतंकवाद के मुद्दे को इसके साथ जोड़ा।
इसके अलावा भारत ने हेग स्थित मध्यस्थता पैनल की कार्यवाही को मान्यता नहीं दी। भारत का कहना है कि पैनल की स्थापना और अधिकार क्षेत्र को लेकर ही सवाल हैं।



