देश में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर सामने आई चिंता
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर एक राष्ट्रीय सर्वे ने कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं। राष्ट्रीय टास्क फोर्स यानी NTF की ओर से किए गए सर्वे में 9% छात्रों ने बताया कि उन्हें आत्महत्या के विचार आते हैं, जबकि 34% छात्रों ने कहा कि वे अपने कैंपस में खुद को बाहरी जैसा महसूस करते हैं।
यह सर्वे देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत और कैंपस के माहौल को समझने के लिए किया गया था। इसमें लाखों छात्रों ने हिस्सा लिया।
12.88 लाख से ज्यादा छात्रों ने लिया हिस्सा
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित National Task Force ने अगस्त 2025 में देशभर में पांच ऑनलाइन सर्वे शुरू किए थे। इनमें छात्रों के साथ-साथ फैकल्टी, माता-पिता, मानसिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों और आम जनता को भी शामिल किया गया था।
छात्रों के सर्वे में 12.88 लाख से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं। सर्वे दिसंबर 2025 में पूरा हुआ। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत, उनकी परेशानियों और कैंपस के माहौल को समझना था।
34% छात्रों को कैंपस में बाहरी जैसा महसूस हुआ
रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा कैंपस में छात्रों के सामाजिक और भावनात्मक अनुभव से जुड़ा है। करीब 34% छात्रों ने बताया कि उन्हें अपने कैंपस में बाहरी जैसा महसूस होता है।
इस आंकड़े से यह पता चलता है कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के लिए कैंपस का सामाजिक माहौल भी महत्वपूर्ण है। किसी संस्थान में पढ़ने वाले छात्र को वहां अपनापन, सहयोग और बातचीत का माहौल मिलना उसकी पूरी छात्र-जीवन की अनुभव को प्रभावित कर सकता है।
9% छात्रों ने बताए आत्महत्या के विचार
NTF सर्वे में 9% छात्रों ने आत्महत्या के विचार आने की बात बताई। यह आंकड़ा छात्र मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामने आई गंभीर चिंताओं में शामिल है।
इस तरह के सर्वे का उद्देश्य केवल आंकड़े सामने रखना नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और बेहतर सपोर्ट सिस्टम की जरूरत को समझना भी है।
एक दशक में छात्र आत्महत्याओं में करीब 65% बढ़ोतरी
NCRB के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में छात्र आत्महत्याओं की संख्या 2013 में 8,423 थी, जो 2023 में बढ़कर 13,892 हो गई। यानी एक दशक में इसमें करीब 65% की वृद्धि हुई।
यह वृद्धि इसी अवधि में देश में आत्महत्याओं की कुल संख्या में हुई करीब 27% बढ़ोतरी से अधिक थी। 2023 में छात्र आत्महत्याएं देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं का लगभग 8.1% थीं।
सिर्फ पढ़ाई नहीं, कैंपस का माहौल भी अहम
छात्रों पर पढ़ाई, परीक्षा, भविष्य और करियर को लेकर कई तरह का दबाव हो सकता है। ऐसे में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ऐसा माहौल जरूरी माना जाता है जहां छात्र अपनी परेशानियों को बिना डर साझा कर सकें।
NTF के सर्वे में कैंपस में बाहरी महसूस करने वाले छात्रों का आंकड़ा भी इसी व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि छात्र कल्याण को केवल अकादमिक प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय मानसिक और सामाजिक सहयोग पर भी ध्यान देने की जरूरत है।



