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IAS शिखर अग्रवाल APO, 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में बड़ा एक्शन

राजस्थान सरकार ने IAS शिखर अग्रवाल को APO किया। परिवार की 40 विला-कॉटेज खरीद और उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला चर्चा में है।

enewsbharat29 October 2026
IAS शिखर अग्रवाल APO, 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में बड़ा एक्शन

राजस्थान में IAS शिखर अग्रवाल पर सरकार का एक्शन

राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को उनके महत्वपूर्ण पदों से हटाकर APO कर दिया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश में उन्हें अगले आदेश तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखने की बात कही गई है।

यह घटनाक्रम उनके परिवार की ओर से करीब 40 विला-कॉटेज खरीदने और फिर उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने से जुड़े मामले के चर्चा में आने के बाद सामने आया है। इस संपत्ति सौदे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, सरकार के आदेश में कार्रवाई का कारण प्रशासनिक बताया गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में आगे कोई औपचारिक जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

क्या है 40 विला-कॉटेज खरीदने का पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IAS शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने करीब ढाई साल के दौरान राजस्थान में 40 विला-कॉटेज खरीदे।

बताया गया है कि इनमें उदयपुर जिले के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट के 20 कॉटेज और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट के 20 विला शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा गया। दोनों जगह की संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस सौदे में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि संपत्तियां खरीदने के बाद उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने के समझौते भी किए गए थे।

हर साल 1.80 करोड़ रुपये की लीज का दावा

रिपोर्ट्स में सामने आए विवरण के मुताबिक, उदयपुर के 20 कॉटेज के लिए सालाना चार लाख रुपये प्रति कॉटेज की लीज राशि तय की गई थी। इस हिसाब से इनसे सालाना 80 लाख रुपये मिलने की बात कही गई है।

वहीं, अलवर के 20 विला के लिए प्रति विला पांच लाख रुपये सालाना की लीज राशि का उल्लेख है। इससे सालाना एक करोड़ रुपये की राशि बनती है।

इस तरह दोनों जगह की संपत्तियों से कुल सालाना लीज राशि करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है।

यानी रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 6.16 करोड़ रुपये की संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को लीज पर दिया गया, जिससे परिवार ने ये संपत्तियां खरीदी थीं। इसी व्यवस्था और संपत्ति संबंधी घोषणाओं को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

संपत्ति के ब्योरे को लेकर भी उठे सवाल

इस मामले में संपत्ति की खरीद और लीज के अलावा अचल संपत्ति की वार्षिक जानकारी यानी IPR को लेकर भी चर्चा हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी की ओर से दाखिल संपत्ति संबंधी विवरणों तथा सामने आई संपत्तियों के बीच कथित अंतर का उल्लेख किया गया है।

दूसरी ओर, रिपोर्ट्स के मुताबिक शिखर अग्रवाल ने संपत्तियों की जानकारी संबंधित दस्तावेजों और टैक्स रिकॉर्ड में देने की बात कही है। उनकी पत्नी के रिकॉर्ड को लेकर भी स्पष्टीकरण का उल्लेख सामने आया है।

इसलिए संपत्ति संबंधी दस्तावेजों, घोषणाओं और लेन-देन की पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और किसी संभावित जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

IAS शिखर अग्रवाल किन पदों पर थे?

APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। इनमें उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद शामिल था।

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इसके अलावा वे निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP), राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) और राजस्थान लघु उद्योग निगम (RAJSICO) से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाल रहे थे।

उनके पास दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण से संबंधित जिम्मेदारियां भी थीं।

सरकार के आदेश के बाद अब वे अगले पदस्थापन आदेश तक APO में रहेंगे।

क्या IPS पत्नी पर भी होगी कार्रवाई?

इस मामले में IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर का नाम भी संपत्तियों की खरीद से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट्स में शिखर अग्रवाल को APO किए जाने की पुष्टि है।

उनकी पत्नी के खिलाफ किसी अलग कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। आगे कोई कदम उठाया जाता है या नहीं, यह सरकार के फैसले और मामले से जुड़े तथ्यों पर निर्भर करेगा।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल इस मामले में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं—संपत्ति की खरीद से जुड़े दस्तावेज, लीज समझौतों की शर्तें और अधिकारियों की ओर से दाखिल संपत्ति संबंधी घोषणाएं।

सरकार ने शिखर अग्रवाल को प्रशासनिक कारणों से APO किया है। इस आदेश को अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस मामले में आगे जांच कराती है या नहीं और संपत्ति से जुड़े सवालों पर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है।


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