वामपंथी राजनीति के भीष्म पितामह हेतराम बेनीवाल के निधन पर किसान नेता कृष्ण सहारण मदेरां ने जताया गहरा शोक
राजस्थान की वामपंथी राजनीति के स्तंभ, पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल के निधन पर किसान नेता कृष्ण सहारण मदेरां ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि 94 वर्ष की आयु में बेनीवाल जी का निधन प्रदेश की किसान-मजदूर राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। वे वर्ष 1990 में संगरिया से विधायक निर्वाचित हुए थे और जीवनभर शोषित, वंचित एवं मेहनतकश वर्ग की आवाज बनकर संघर्षरत रहे।
मदेरां ने कहा कि बेनीवाल जी को किसान-मजदूर आंदोलनों का ‘भीष्म पितामह’ यूं ही नहीं कहा जाता था। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, स्पष्टवादिता और जनहित के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक रहा। वे सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए संगठन और विचारधारा के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करते रहे।
प्रदेश में जब भी ‘लाल झंडे’ के संघर्षों और खेत-खलिहान की लड़ाइयों का इतिहास लिखा जाएगा, उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि हेतराम बेनीवाल ने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम माना।
किसानों के अधिकार, मजदूरों के सम्मान और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने कहा कि स्व. हेतराम बेनीवाल का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ बना रहेगा। उनका निधन केवल एक पूर्व विधायक का जाना नहीं, बल्कि राजस्थान के जनआंदोलनों के एक सशक्त और जीवंत अध्याय का अवसान है।
कृष्ण सहारण मदेरां ने शोक संतप्त परिजनों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है।
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