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हरीश राणा केस: इच्छामृत्यु प्रक्रिया अंतिम चरण में

हरीश राणा के मामले में AIIMS में पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया शुरू। ऑक्सीजन और फीडिंग सपोर्ट हटाने का निर्णय, सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस के तहत निगरानी जारी

Enews Bharat17 March 2026
हरीश राणा केस: इच्छामृत्यु प्रक्रिया अंतिम चरण में

हरीश राणा केस: इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अंतिम चरण में

देश में इच्छामृत्यु को लेकर एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां Harish Rana के लिए ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

AIIMS Delhi में विशेषज्ञों की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया के तहत जीवन रक्षक उपकरणों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।

ऑक्सीजन और फीडिंग सपोर्ट हटाने का फैसला

मेडिकल कमेटी की अहम बैठक के बाद यह तय किया गया कि अब हरीश राणा को किसी भी प्रकार का कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जाएगा

इसके साथ ही, उन्हें जीवित रखने के लिए दी जा रही फीडिंग ट्यूब के जरिए पोषण और हाइड्रेशन भी बंद कर दिया गया है।

यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है ताकि सभी मेडिकल और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों की टीम कर रही निगरानी

AIIMS में 5 से 9 विशेषज्ञों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम इस पूरे मामले की निगरानी कर रही है।

अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए हरीश राणा की नब्ज, शारीरिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

डॉक्टरों का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह गरिमापूर्ण और नियंत्रित तरीके से पूरी हो।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन

यह पूरा मामला Supreme Court of India द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के तहत संचालित किया जा रहा है।

पैसिव यूथेनेशिया के मामलों में अदालत ने स्पष्ट किया है कि:

  • मरीज की स्थिति का विस्तृत मेडिकल मूल्यांकन जरूरी है

  • परिवार की सहमति और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है

  • विशेषज्ञों की टीम द्वारा निगरानी आवश्यक है

AIIMS प्रशासन इन सभी मानकों का सख्ती से पालन कर रहा है।

संवेदनशीलता के कारण गोपनीयता बरकरार

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी और गोपनीयता के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।

AIIMS के शांत वातावरण में चल रही यह प्रक्रिया न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और कानूनी पहलुओं के बीच संतुलन का भी उदाहरण है।

क्या है पैसिव यूथेनेशिया?

पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है मरीज को कृत्रिम रूप से जीवित रखने वाले उपकरणों को हटाना या बंद करना, जिससे प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सके।

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भारत में यह प्रक्रिया कड़े कानूनी और मेडिकल नियमों के तहत ही लागू की जाती है।

मानवीय और कानूनी पहलुओं के बीच संतुलन

हरीश राणा का मामला यह दिखाता है कि कैसे आधुनिक चिकित्सा और कानून मिलकर ऐसे कठिन फैसलों को संभालते हैं।

यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानव गरिमा, अधिकार और संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा भी है।


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