कांवड़ लेने गया था बेटा', पर लौटी लाश—परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
हरियाणा के गुरुग्राम में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मुठभेड़ में मारे गए चार कथित शूटरों में से तीन युवक रोहतक जिले के भालोट गांव के रहने वाले थे। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सबसे भावुक पहलू यह है कि तीनों युवक अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे बताए जा रहे हैं। उनके निधन के बाद तीन परिवारों का बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोगों में गहरा आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।
'कांवड़ लेने गया था, लेकिन घर लौटी लाश'
मृतकों के परिजनों का दावा है कि उनके बेटे कांवड़ यात्रा पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। परिवारों का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके बेटे किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थे।
जब एनकाउंटर की खबर सामने आई और शव घर पहुंचे, तो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल
एनकाउंटर के बाद मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस अपनी नाकामी छिपाने के लिए निर्दोष युवकों को निशाना बना रही है।
परिजनों ने मामले की न्यायिक या निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई उपलब्ध खुफिया जानकारी और परिस्थितियों के आधार पर की गई।
भालोट गांव में पसरा मातम
रोहतक के भालोट गांव में इस घटना के बाद हर घर में दुख का माहौल है। तीन परिवारों ने अपने इकलौते बेटों को खो दिया, जिससे पूरे गांव में शोक और नाराजगी दोनों का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी युवक पर आरोप थे, तो कानून के तहत निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। वहीं, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।




