घड़साना क्षेत्र में प्रसूता सुदेश कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घटना के बाद परिजनों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
मामले में निजी अस्पताल शांति नर्सिंग होम और उसके संचालक डॉ. राजेश गौड़ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को प्रसव पीड़ा के चलते सुदेश कुमारी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर ने सुरक्षित प्रसव का आश्वासन दिया था।
परिजनों का आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया और गंभीर स्थिति में भी महिला को समय पर बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया गया। बाद में बीकानेर भेजा गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी, जिससे जच्चा और गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई।
घटना के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग पर मामले को दबाने और लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समय पर रेफर नहीं किया गया, इलाज में गंभीर चूक हुई और बाद में सच्चाई छिपाने का प्रयास किया गया।
“सुदेश कुमारी न्याय मंच” के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कई मांगें रखी हैं, जिनमें डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी, नर्सिंग होम का लाइसेंस रद्द करना, सोनोग्राफी मशीन और पिछले तीन साल के रिकॉर्ड की जांच, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना शामिल है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 9 अप्रैल 2026 तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उपखंड कार्यालय के बाहर महापड़ाव किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह अब केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के न्याय की लड़ाई बन चुका है।
प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।




