केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के फ्लैगशिप प्रोग्राम "मेरा गांव मेरा गौरव" के अंतर्गत फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के तहत गरजेड़ा गांव में 24 अप्रैल 2026 को किसान वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम (रात्रि चौपाल) आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और देशी खाद जैसे सड़ी गोबर खाद, हरी खाद (ढैंचा) तथा फसली अवशेषों से खाद बनाने के लिए जागरूक किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑर्गेनिक और केंचुआ खाद बनाने के तरीके और उनके लाभों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही पशु पोषण प्रबंधन, पशु प्रजनन प्रबंधन और गर्मियों में पशुओं की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी किसानों को दिए गए। पशुओं की बीमारियों के लिए परामर्श प्रदान किया गया तथा पशुपालकों को मिनरल मिक्सचर ईंट भी वितरित की गई।
फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के पीआई डॉ. सत्यवीर सिंह डागी ने किसानों से सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर ही रासायनिक उर्वरकों के उपयोग की अपील की, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित खाद का उपयोग हो सके। उन्होंने भविष्य में प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को अपनाने तथा लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में खेती में फसल चक्र अपनाने और सही समय व मात्रा में खाद उपयोग के महत्व पर भी चर्चा की गई। इस किसान गोष्ठी में गरजेड़ा गांव के 85 किसानों ने भाग लिया।
इस दौरान टीम लीडर डॉ. सत्यवीर सिंह डागी, डॉ. मेघा पांडे, डॉ. राजेश बिश्नोई, डॉ. अमरसिंह मीना एवं अंशुल शर्मा ने विभिन्न विषयों पर किसानों से संवाद किया। साथ ही गांव के वार्ड सदस्य बजरंग लाल गुर्जर ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए टीम का आभार व्यक्त किया।
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