गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। कलेक्ट्रेट के बाहर किसानों ने जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
जी.के.एस. के प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह (राजू) और किसान नेता वीरदीप के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को खुलकर रखा।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में गेहूं का उत्पादन करीब 15 क्विंटल प्रति बीघा हो रहा है, जबकि सरकारी गाइडलाइन में इसे कम दर्शाया गया है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने खराब मौसम और बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कहते हुए मानकों में छूट देने की मांग की। इसके साथ ही सरकार द्वारा तय 49 लाख टन खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर वास्तविक उत्पादन के अनुसार करने की मांग उठाई, क्योंकि अनुमानित उत्पादन 80 लाख टन तक बताया जा रहा है।
इसके अलावा किसानों ने पंजीकरण प्रक्रिया को जटिल बताते हुए इसे सरल बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनाधार कार्ड की अनिवार्यता से कई किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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