फ्री दूध से डेयरी स्टार्टअप बना 2 करोड़ का कारोबार
डेयरी बिजनेस को अक्सर लोग सिर्फ दूध बेचने और पशुपालन तक सीमित मानते हैं, लेकिन एक इंजीनियर कपल ने इसी काम को एक अलग बिजनेस मॉडल में बदलकर मिसाल कायम की। इस कपल ने 20 गायों से अपने डेयरी स्टार्टअप की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्होंने लोगों को फ्री दूध बांटकर अपने प्रोडक्ट को आजमाने का मौका दिया। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और यही तरीका उनके बिजनेस की पहचान बन गया। आज उनका डेयरी कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
इस डेयरी स्टार्टअप की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी बड़े निवेश या बहुत बड़े सेटअप से नहीं हुई थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई और नौकरी की संभावनाओं के बीच इस कपल ने डेयरी फार्मिंग को अपना बिजनेस बनाने का फैसला किया। उन्होंने शुरुआत में सीमित संख्या में गायों के साथ काम शुरू किया और धीरे-धीरे अपने ग्राहक बढ़ाए।
20 गायों से हुई डेयरी बिजनेस की शुरुआत
शुरुआत में कपल के पास करीब 20 गायें थीं। इतने छोटे स्तर से डेयरी बिजनेस शुरू करना आसान नहीं था। पशुओं की देखभाल, चारे का इंतजाम, दूध निकालना, उसकी क्वालिटी बनाए रखना और ग्राहकों तक दूध पहुंचाना, इन सभी कामों पर उन्हें खुद ध्यान देना पड़ा।
उनका फोकस सिर्फ ज्यादा दूध बेचने पर नहीं था, बल्कि ग्राहकों को अच्छी क्वालिटी का दूध उपलब्ध कराने पर था। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों को अपना दूध फ्री में देकर उसे आजमाने का मौका दिया।
फ्री दूध बांटकर बनाया भरोसा
डेयरी बिजनेस में सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों का भरोसा जीतना होता है। पैकेट वाले दूध और स्थानीय डेयरी के बीच ग्राहक अक्सर क्वालिटी को लेकर असमंजस में रहते हैं। ऐसे में इस कपल ने एक अलग तरीका अपनाया।
उन्होंने संभावित ग्राहकों को फ्री दूध दिया और कहा कि पहले इसे इस्तेमाल करके देखें। अगर दूध पसंद आए तो आगे खरीद सकते हैं। इस तरीके से लोगों को बिना पैसे खर्च किए दूध की क्वालिटी जांचने का मौका मिला।
धीरे-धीरे जिन लोगों ने दूध इस्तेमाल किया, उनमें से कई नियमित ग्राहक बन गए। एक ग्राहक से दूसरे ग्राहक तक बात पहुंचने लगी और बिना बड़े विज्ञापन खर्च के उनका ग्राहक आधार बढ़ने लगा।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई को बनाया बिजनेस में ताकत
दोनों इंजीनियर होने की वजह से उन्होंने डेयरी बिजनेस को पारंपरिक तरीके से चलाने के बजाय इसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। उन्होंने बिजनेस में क्वालिटी, ग्राहक अनुभव और संचालन को अहम माना।
डेयरी में सिर्फ गायों की संख्या बढ़ा देना ही पर्याप्त नहीं होता। पशुओं के स्वास्थ्य, खाने-पीने, साफ-सफाई और दूध की गुणवत्ता पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। इसके साथ ही ग्राहकों की जरूरत और दूध की नियमित सप्लाई को भी संभालना होता है।
इसी तरह धीरे-धीरे उन्होंने अपने डेयरी कारोबार को एक छोटे फार्म से बिजनेस में बदलने की दिशा में आगे बढ़ाया।
ग्राहक बढ़े तो कारोबार भी बढ़ता गया
शुरुआत में जब फ्री दूध बांटा गया तो इसका उद्देश्य सीधे तौर पर कमाई करना नहीं था। इसका मकसद लोगों को प्रोडक्ट से जोड़ना और उनका भरोसा जीतना था। जब ग्राहकों को दूध पसंद आया तो उन्होंने नियमित रूप से दूध लेना शुरू किया।
इसके बाद नए ग्राहक भी जुड़ते गए। ग्राहक बढ़ने के साथ दूध की मांग बढ़ी और बिजनेस को भी आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी। धीरे-धीरे इस डेयरी स्टार्टअप का कारोबार बड़े स्तर पर पहुंच गया।



