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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने हिमायनी पुरी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले झूठे कंटेंट पर रोक लगाई, मानहानि मामले में 10 करोड़ हर्जाने की मांग

Enews Bharat17 March 2026
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश

एपस्टीन मामले में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने दिया कंटेंट ब्लॉक करने का आदेश

Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri की बेटी Himayni Puri को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित झूठे और अपमानजनक कंटेंट को ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला तब सामने आया जब हिमायनी पुरी को कुख्यात अपराधी Jeffrey Epstein से जोड़कर कई प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट और वीडियो वायरल किए गए।

कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन आरोपों को झूठा और आधारहीन मानते हुए संबंधित कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है।

हालांकि, फिलहाल यह आदेश वैश्विक स्तर पर लागू नहीं किया गया है, लेकिन भारत में ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

हिमायनी पुरी ने मांगा 10 करोड़ का हर्जाना

हिमायनी पुरी ने अदालत में याचिका दायर कर 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ फैलाए जा रहे आरोप न केवल झूठे हैं, बल्कि उनकी पेशेवर छवि और व्यक्तिगत सम्मान को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

वकील महेश जेठमलानी की दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता Mahesh Jethmalani ने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इन्हें जानबूझकर हिमायनी पुरी को बदनाम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

साथ ही, उन्होंने ‘जॉन डो’ आदेश की भी मांग की, ताकि अज्ञात लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैली गलत जानकारी

याचिका के अनुसार, 22 फरवरी 2026 के बाद से कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर:

  • वीडियो

  • आर्टिकल

  • सोशल मीडिया पोस्ट

के जरिए हिमायनी पुरी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई।

इन प्लेटफॉर्म्स में X (Twitter), YouTube, Instagram, Facebook और LinkedIn शामिल हैं।

“सिर्फ मंत्री की बेटी होने की वजह से निशाना”

हिमायनी पुरी ने अदालत में कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वह एक केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका

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जेफरी एपस्टीन से कभी कोई व्यावसायिक या निजी संबंध नहीं रहा और यह पूरी तरह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।

मानहानि और डिजिटल कानून पर बड़ा संकेत

यह मामला भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फेक न्यूज और मानहानि के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

कोर्ट का यह आदेश दिखाता है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है।


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