मध्य प्रदेश के छतरपुर सहित कई शहरों में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है—शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन रोजगार के अवसर उसी गति से नहीं बढ़ पा रहे। हालात ऐसे हैं कि पढ़े-लिखे युवा नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि कंपनियां स्किल की कमी का हवाला दे रही हैं।
हालिया Periodic Labour Force Survey के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की कुल बेरोजगारी दर भले ही 3.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन शहरी क्षेत्रों की स्थिति कहीं ज्यादा चिंताजनक है। छतरपुर जैसे शहरों में बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण क्षेत्रों (2.9 प्रतिशत) की तुलना में काफी अधिक है।
सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर देखा जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि शहरों में हर 100 में से लगभग 9 महिलाएं रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल पा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां महिलाओं की कार्य सहभागिता 42.2 प्रतिशत है, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह घटकर केवल 20.2 प्रतिशत रह जाती है।
शिक्षा स्तर के अनुसार देखें तो स्नातक युवाओं के लिए स्थिति सबसे कठिन है। स्नातक पुरुषों में बेरोजगारी दर 10.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि स्नातक महिलाओं में यह आंकड़ा 20.4 प्रतिशत तक पहुंचकर गंभीर संकेत दे रहा है। इसके विपरीत, स्नातकोत्तर युवाओं की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जिससे यह साफ होता है कि केवल डिग्री नहीं, बल्कि उच्च कौशल और विशेषज्ञता की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान नौकरी बाजार में पारंपरिक डिग्री से अधिक स्किल आधारित शिक्षा की जरूरत है। इसी दिशा में सरकार ने Skill India Mission, National Career Service और Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करना है।
इसके अलावा, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, जिनसे युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। छतरपुर जैसे क्षेत्रों में खजुराहो पर्यटन और कृषि आधारित उद्योगों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।




