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पुराने वाहनों के लिए E10 की वापसी? E20 पर CEA की खाद्य और जल संकट की चेतावनी

पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प देने की सलाह सामने आई है। CEA ने E20 से आगे एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने से पहले खाद्य और जल सुरक्षा के आकलन की जरूरत बताई।

eNews Bharat17 August 2026
पुराने वाहनों के लिए E10 की वापसी? E20 पर CEA की खाद्य और जल संकट की चेतावनी

पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल विकल्प की सलाह, E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा और जल संकट का आकलन जरूरी

नई दिल्ली। देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन और आकाश पूजारी ने अपने हालिया लेख में पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प फिर से उपलब्ध कराने की सलाह दी है। साथ ही, E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा और पानी की उपलब्धता पर पड़ने वाले असर का विस्तृत आकलन करने की जरूरत बताई है।

पुराने दोपहिया वाहनों के लिए E20 पर चिंता

देश में बड़ी संख्या में पुराने दोपहिया वाहन अभी भी कार्बोरेटर तकनीक पर चल रहे हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने टू-व्हीलर्स सड़कों पर हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले इंजन, रबर सील और प्लास्टिक के कुछ हिस्से आधुनिक E20 ईंधन के अनुरूप नहीं हो सकते।

विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल से पुराने वाहनों में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इनमें इंजन के हिस्सों पर असर, धातु के घिसाव और माइलेज में कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे में पुराने वाहनों के मालिकों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पेट्रोल पंपों पर E10 और E20 दोनों विकल्प देने का सुझाव

CEA की ओर से सुझाव दिया गया है कि पुराने वाहनों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 ईंधन का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे नए और पुराने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन चुनने की सुविधा मिल सकेगी और पुराने इंजन पर संभावित असर को कम किया जा सकेगा।

E20 के आगे बढ़ने पर Food vs Fuel की चुनौती

एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और मक्का जैसी कृषि फसलों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाकर 30 प्रतिशत या उससे अधिक किया जाता है, तो खाद्य उत्पादन और ईंधन की जरूरत के बीच संतुलन की चुनौती बढ़ सकती है।

चिंता सिर्फ खाद्यान्न तक सीमित नहीं है। गन्ने और मक्का जैसी फसलों की खेती में पानी की भी बड़ी जरूरत होती है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में पानी की मांग बढ़ने पर भूजल और जल संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए E20 से आगे बढ़ने से पहले

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Food vs Fuel और Water vs Fuel के प्रभाव का मूल्यांकन जरूरी माना जा रहा है।

सरकार का E20 को लेकर क्या कहना है?

सरकार का आधिकारिक पक्ष है कि नए वाहनों के लिए E20 पेट्रोल का परीक्षण किया गया है और ये वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुकूल बनाए जा रहे हैं। सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिली है।

ऐसे में मौजूदा बहस E20 को पूरी तरह वापस लेने की नहीं, बल्कि अलग-अलग पीढ़ी के वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने और एथेनॉल मिश्रण को आगे बढ़ाते समय खाद्य एवं जल सुरक्षा का संतुलन बनाए रखने की है।


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