मध्य प्रदेश के धार जिले के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहली बार रेल इंजन ने पीथमपुर से धार के बीच बने नए ट्रैक पर सफलतापूर्वक दौड़ लगाई। वर्षों से जिस रेल परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब हकीकत में बदलती नजर आ रही है।
करीब 38 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर अंतिम दिन ट्रायल के दौरान इंजन ने महज 53 मिनट में दूरी तय की। जैसे ही इंजन सीटी बजाते हुए धार रेलवे स्टेशन पहुंचा, वहां मौजूद लोगों की खुशी देखते ही बन रही थी। नागरिकों ने तिरंगा लहराकर और जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया।
तीन दिवसीय ट्रायल के दौरान रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक की मजबूती, सुरक्षा मानकों और तकनीकी पहलुओं का बारीकी से परीक्षण किया। पहले दिन इंजन ने धीमी गति से चलते हुए लगभग 1 घंटा 50 मिनट में दूरी तय की, जबकि अंतिम दिन स्पीड बढ़ाकर 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंचाई गई, जिससे समय में बड़ा सुधार हुआ।
इस मौके पर ‘रेल लाओ महासमिति’ और स्थानीय नागरिकों ने अधिकारियों का स्वागत कर आभार जताया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल रेल लाइन नहीं, बल्कि धार की जनता का दशकों पुराना सपना है, जो अब पूरा होने के करीब है।
हालांकि, इंदौर से धार के बीच पूरी रेल सेवा शुरू होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। टीही टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जहां करीब 2 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाना बाकी है। अधिकारियों का दावा है कि जून तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे विभाग की योजना के अनुसार, यदि सब कुछ तय समय पर पूरा हो गया, तो जुलाई के पहले सप्ताह तक इंदौर-धार के बीच लोकल ट्रेन सेवा शुरू की जा सकती है। इससे क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार, शिक्षा व रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
यह परियोजना न केवल धार के विकास को गति देगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता भी रखती है।




