रांची में प्रदर्शनकारी देवेंद्र महतो ने तोड़ा वॉटर फास्ट, सोनम वांगचुक से लाइव बातचीत के बाद लिया फैसला
रांची में छात्रों की मांगों के समर्थन में लंबे समय से वॉटर फास्ट पर बैठे प्रदर्शनकारी देवेंद्र महतो ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला उस समय लिया गया जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने उनसे लाइव बातचीत की और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन से जुड़े छात्रों और समर्थकों के बीच नई उम्मीद और सकारात्मक संदेश देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, देवेंद्र महतो पिछले कई दिनों से छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर रांची में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उनके वॉटर फास्ट ने स्थानीय लोगों, छात्रों और कई सामाजिक संगठनों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं और मांगों को सरकार तथा प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना था।
लाइव बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो से कहा कि किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग होते हैं और आंदोलन को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए आंदोलनकारियों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने अपील की कि संघर्ष जारी रहे, लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर नहीं। सोनम वांगचुक ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात रखने पर जोर दिया।
सोनम वांगचुक की अपील को स्वीकार करते हुए देवेंद्र महतो ने अपना वॉटर फास्ट समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब इसे नए तरीके और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने छात्रों और समर्थकों से भी शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ अपनी मांगों को उठाने की अपील की।
देवेंद्र महतो के इस फैसले का वहां मौजूद छात्रों और समर्थकों ने स्वागत किया। कई लोगों ने इसे आंदोलन के लिए सकारात्मक कदम बताया। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य समाज और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना है और इसके लिए आंदोलनकारियों का स्वस्थ रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक की अपील का प्रभाव केवल इस आंदोलन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देशभर में चल रहे शांतिपूर्ण जन आंदोलनों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी मांगों को रखना अधिक प्रभावी होता है।




