कच्चे तेल के सस्ता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती, रुपये पर घटा दबाव और शेयर बाजार के लिए बढ़ीं उम्मीदें।
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। डीएसपी (DSP) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल के सस्ता होने, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की निकासी में कमी और रुपये में निवेश वाली परिसंपत्तियों के आकर्षक मूल्यांकन से भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने वाली नीतियां जारी रख सकता है। पर्याप्त तरलता बनाए रखने से बॉन्ड यील्ड में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती मिल सकती है।
अर्थव्यवस्था में दिख रही मजबूती
डीएसपी के मुताबिक देश में इस समय अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध है और घरेलू मांग में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। इससे भारत के ग्रोथ आउटलुक में और सुधार की संभावना है। रिपोर्ट का मानना है कि बेहतर आर्थिक वृद्धि, खासकर नॉमिनल ग्रोथ, कॉरपोरेट कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे उनके वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
बैलेंस ऑफ पेमेंट बना बड़ी ताकत
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) अर्थव्यवस्था की प्रमुख मजबूती बनकर उभर सकता है। जिसे पहले बाजार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा था, वही अब सकारात्मक संकेत दे रहा है।
रुपये में निवेश वाली परिसंपत्तियों पर बेहतर रिटर्न, रुपये का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) आकर्षक स्तर पर पहुंचना, बड़ी कंपनियों के शेयरों का कम मूल्यांकन और एफपीआई के डेट निवेश में बढ़ोतरी जैसे कारकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर को मजबूत किया है।
रुपये पर कम हुआ दबाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2026 में भारत का REER 88 से नीचे पहुंच गया, जो आमतौर पर गंभीर आर्थिक दबाव के समय देखने को मिलता है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच महंगाई का अंतर कम होने से लंबे समय में रुपये के तेज़ी से कमजोर होने की आशंका भी घटी है।




