दसवीं के बाद सही विषय चयन कैसे करें? पेरेंट्स और विद्यार्थियों के लिए चुनौती
✍️ डॉ नयन प्रकाश गांधी, इंटरनेशनल एनएलपी लाइफ करियर कोच, कोटा (राजस्थान)
हाल ही में राजस्थान बोर्ड के दसवीं कक्षा के परिणाम घोषित हो चुके हैं और अब सीबीएसई सहित अन्य बोर्डों के परिणाम भी आने की प्रक्रिया में हैं। दसवीं के बाद का समय किसी भी विद्यार्थी के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ होता है। यही वह चरण है, जहां लिया गया निर्णय उसके पूरे भविष्य की दिशा तय करता है।
अक्सर देखा जाता है कि पेरेंट्स विषय चयन को केवल अंकों या समाज के प्रभाव के आधार पर तय कर देते हैं। अच्छे अंक आने पर सीधे साइंस दिला दी जाती है, जबकि बच्चे की वास्तविक रुचि, क्षमता और सोचने के तरीके पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। यही गलती आगे चलकर मानसिक तनाव और करियर असंतुलन का कारण बनती है।
वास्तव में हर बच्चा अलग होता है। उसकी रुचि, एप्टीट्यूड और माइंडसेट अलग-अलग होते हैं। इसलिए एक जैसा निर्णय सभी पर लागू करना उचित नहीं है। सही विषय चयन वही है, जो बच्चे की स्वाभाविक रुचि और योग्यता के अनुरूप हो।
आज के समय में करियर विकल्पों की विविधता पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के अलावा वोकेशनल कोर्स और डिप्लोमा प्रोग्राम्स भी उपलब्ध हैं। साइंस से इंजीनियरिंग, मेडिकल और रिसर्च के रास्ते खुलते हैं, जबकि कॉमर्स से फाइनेंस, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और मैनेजमेंट के अवसर मिलते हैं। वहीं आर्ट्स में भी साइकोलॉजी, मीडिया, सिविल सर्विस, पब्लिक पॉलिसी और सोशल साइंसेज जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं।
इसलिए विषय चयन से पहले साइकोमेट्रिक असेसमेंट और एप्टीट्यूड टेस्ट जैसे वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करना जरूरी है। एक प्रशिक्षित करियर कोच बच्चे की रुचि, मानसिक क्षमता और सामाजिक पृष्ठभूमि को समझकर सही दिशा प्रदान करता है।
करियर कोच न केवल विकल्पों की जानकारी देते हैं, बल्कि एक स्पष्ट करियर रोडमैप तैयार करने में मदद करते हैं, जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय ले पाते हैं।
पेरेंट्स की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी इच्छाओं व सोच को समझना चाहिए। यदि पेरेंट्स मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, तो बच्चा बेहतर निर्णय ले सकता है।




