राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर CJP ने नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। संगठन की टीमें अब आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों और कॉलेजों का दौरा करेंगी और वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने लाने की कोशिश करेंगी।
CJP के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष रांका ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो कैंपेन’ की शुरुआत उदयपुर संभाग से की जाएगी।
उदयपुर संभाग से होगी शुरुआत
अभियान के तहत टीम उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झालावाड़, सिरोही और बारां-अंता समेत आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में स्कूलों का दौरा करेगी।
टीमों का मकसद सिर्फ स्कूलों को देखना नहीं, बल्कि वहां की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना और जिन सुविधाओं की कमी है, उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने उठाना बताया गया है।
स्कूलों में भवन, पढ़ाई के लिए जरूरी जगह और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को देखा जाएगा। इसके बाद अभियान को देश के दूसरे आदिवासी इलाकों तक ले जाने की योजना भी बताई गई है।
‘आशीर्वाद का दिया’ से जुड़ा अभियान
इस अभियान का एक कनेक्शन राजस्थान सरकार के स्कूलों और कॉलेजों में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने के कार्यक्रम से भी है।
CJP की ओर से कहा गया है कि वह आदिवासी इलाकों के स्कूलों में भी यह दिया जलाएगी और उम्मीद करेगी कि इसके बहाने सरकार इन स्कूलों की समस्याओं पर ध्यान दे।
यानी संगठन इस कार्यक्रम को स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे से जोड़कर देख रहा है।
पहले से चल रहा है ‘स्कूल ठीक करो कैंपेन’
CJP का कहना है कि आदिवासी स्कूलों वाला अभियान उसके पहले से चल रहे ‘स्कूल ठीक करो कैंपेन’ का दूसरा चरण है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान 15 अगस्त को सरकारी स्कूलों का नागरिकों के नेतृत्व में ऑडिट करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। CJP ने दावा किया है कि राजस्थान में 500 से ज्यादा स्कूलों की ऑडिटिंग की जा चुकी है और देशभर में यह संख्या 15 हजार से अधिक है। ये आंकड़े संगठन के अपने दावे हैं।
रांका बोले- स्कूल ठीक करने के लिए मारपीट का इंतजार क्यों?
अभियान को लेकर आशुतोष रांका ने स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर स्कूलों को ठीक करने के लिए पहले किसी घटना या विवाद का इंतजार करना पड़े, तो यह सही तरीका नहीं है।
उन्होंने कहा, “मारपीट के बाद ही स्कूल ठीक करेंगे तो हम पिटने को तैयार हैं।”
उनका कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल और जरूरी सुविधाएं पहले से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने पुराने स्कूल हादसों का जिक्र करते हुए भी कहा कि किसी दुर्घटना के बाद सुधार करने के बजाय पहले से स्कूलों की स्थिति जांची जानी चाहिए।



