नोएडा मजिस्ट्रेट को फटकार, FIR मामले में उठे सवाल
नोएडा में एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में जारी नोटिस को लेकर अदालत में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने नोएडा मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। मामला उस FIR से जुड़ा है, जिसे अदालत पहले ही रद्द करने का आदेश दे चुकी थी। इसके बावजूद संबंधित मामले में नोटिस जारी किए जाने पर सवाल उठे।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट से यह जानना चाहा कि जब FIR को रद्द करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका था, तो उसके बाद नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।
FIR रद्द होने के बावजूद नोटिस से विवाद
मामला GBU छात्र अक्षत त्रिपाठी और नोएडा में हुए प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रदर्शन के संबंध में दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश अदालत की ओर से दिया जा चुका था।
इसके बावजूद नोटिस जारी होने के बाद मामला दोबारा चर्चा में आ गया। इसी को लेकर अदालत में सवाल उठे कि न्यायिक आदेश के बाद निचली अदालत की ओर से आगे की कार्रवाई किस आधार पर की गई।
CJI ने जताई कड़ी नाराजगी
सुनवाई के दौरान CJI ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने सवाल उठाया कि जब संबंधित FIR को रद्द करने का आदेश दिया जा चुका था, तो फिर नोटिस जारी करने का अधिकार या आधार क्या था।
अदालत की नाराजगी का केंद्र यही था कि पहले से पारित न्यायिक आदेश के बावजूद मामले में आगे की कार्रवाई क्यों की गई। सुनवाई के दौरान न्यायिक प्रक्रिया और आदेशों के अनुपालन को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई।
GBU छात्र अक्षत त्रिपाठी का मामला
यह पूरा विवाद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र अक्षत त्रिपाठी के मामले के कारण सामने आया। प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR और उसके बाद हुई न्यायिक कार्रवाई को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा।
FIR रद्द किए जाने के बाद मामला समाप्त होने की स्थिति में माना जा रहा था, लेकिन नोटिस जारी होने से विवाद फिर सामने आ गया।
मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर क्यों उठे सवाल?
किसी मामले में अदालत द्वारा FIR रद्द किए जाने के बाद उससे संबंधित आगे की न्यायिक कार्रवाई का आधार महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी बिंदु पर सुनवाई के दौरान सवाल उठे।
CJI ने यह स्पष्ट करने की जरूरत महसूस की कि जब FIR को लेकर पहले ही आदेश पारित हो चुका था, तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत की सख्ती से यह संदेश भी सामने आया कि न्यायिक आदेशों का पालन निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।



