कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीणा ने बुधवार को चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर उर्वरक उपलब्धता, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन एवं कृषि आदान वितरण प्रणाली का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों एवं विक्रेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
संयुक्त निदेशक ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह संतोषजनक है और किसी प्रकार की कमी नहीं है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न अधिकृत आदान विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर जाकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। साथ ही वितरण रजिस्टरों की जांच कर पीओएस मशीनों के माध्यम से की जा रही बिक्री प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि उर्वरक वितरण में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जाना अनिवार्य है।
उर्वरकों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर सतत निगरानी बनाए रखने के लिए विभाग द्वारा 16 निरीक्षकों की विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम नियमित रूप से क्षेत्र में निरीक्षण कर रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान कृषि अधिकारियों ने हस्तगंज ढाणी में आयोजित चौपाल में किसानों से संवाद भी किया। अधिकारियों ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी, जिससे लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो सके।
निरीक्षण के दौरान सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक लोकेश मीणा, विनोद जैन सहित अन्य विभागीय अधिकारी और कार्मिक उपस्थित रहे।
यह निरीक्षण किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता एवं सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




