चारभुजा नाथ का 31 दिवसीय पंचामृत एवं दुग्धाभिषेक महोत्सव आयोजित
आस्था, इतिहास और दिव्यता का संगम है चारभुजा नाथ मंदिर
पुरुषोत्तम (अधिक) मास के पावन अवसर पर प्रभु श्री चारभुजा नाथ मंदिर, मकराना में भगवान श्री चारभुजा नाथ का 31 दिवसीय पंचामृत एवं दुग्धाभिषेक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया जा रहा है।
मंदिर के पुजारी महेश दाधीच ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन भगवान श्री चारभुजा नाथ का पंचामृत एवं दुग्धाभिषेक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जा रहा है। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर भगवान के दर्शन एवं अभिषेक का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मंदिर परिसर में प्रतिदिन भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु भगवान के विशेष श्रृंगार, पूजन-अर्चन एवं अभिषेक में भाग लेकर आध्यात्मिक शांति और दिव्य अनुभूति का अनुभव कर रहे हैं।
आस्था, इतिहास और दिव्यता का संगम है चारभुजा नाथ मंदिर
मकराना स्थित श्री चारभुजा नाथ मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और चमत्कार का जीवंत केंद्र माना जाता है। यहां विराजमान भगवान श्री चारभुजा नाथ के प्रति भक्तों की अटूट आस्था है। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रभु के दिव्य दर्शन और मनोहारी श्रृंगार को देखकर मन की थकान दूर हो जाती है तथा हृदय में अद्भुत शांति का अनुभव होता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार श्री चारभुजा नाथ जी की दिव्य प्रतिमा दो बार खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। मान्यता है कि यह प्रतिमा एक बावड़ी से स्वयं प्रकट हुई थी और प्रतिमा के प्रकट होते ही बावड़ी दूध से भर गई थी। इस घटना को श्रद्धालु आज भी प्रभु की दिव्यता और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह प्रतिमा किसी मानव द्वारा निर्मित नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित मानी जाती है। कहा जाता है कि प्रतिमा को निकालते समय उसके हाथ खंडित हो गए थे, तब प्रभु ने संदेश दिया कि शालग्राम प्रतिमा का प्रत्येक अंश पूजनीय होता है।
बताया जाता है कि प्रारंभ में इस मंदिर में ठाकुर श्री बालकृष्ण जी विराजमान थे, बाद में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्री चारभुजा नाथ को प्रतिष्ठित किया गया। तभी से यह धाम श्रद्धा, भक्ति, चमत्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।




