चारनेट के पावन दर्रा स्थल पर श्रद्धा और आस्था का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। समस्त ग्रामवासियों एवं धर्मप्रेमी जनों के सहयोग से श्री दर्रा बालाजी महाराज के भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ कल दिनांक 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को प्रातः 9:00 बजे शुभ मुहूर्त में नींव शिलान्यास एवं भूमि पूजन के साथ किया जाएगा।
प्रस्तावित मंदिर लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से अग्नि कोण में निर्मित होगा, जो क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नई दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 7:30 बजे से 9:00 बजे तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान उच्चतम बोली लगाने वाले दानवीर को घोड़ी पर विराजित कर श्री रामदेव जी मंदिर (पुरानी स्कूल भवन) से मुख्य बाजार मार्ग होते हुए दर्रा बालाजी मंदिर प्रांगण तक डीजे की धुनों के साथ ले जाया जाएगा।
आयोजन को लेकर चारनेट सहित आसपास के गांवों में उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम के उपलक्ष्य में घर-घर मिठाई वितरण किया जाएगा तथा सर्व समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। समिति द्वारा श्रद्धालुओं से निवेदन किया गया है कि वे अपने घर से एक पत्थर, ईंट का टुकड़ा या पवित्र मिट्टी साथ लाकर मंदिर की नींव में अपना योगदान दें, जिससे प्रत्येक व्यक्ति का भाव इस पवित्र निर्माण से जुड़ सके।
शिल्पी मुकेश घनश्याम भीनमाल ने बताया कि इस भव्य मंदिर में कुल तीन शिखर बनाए जाएंगे। मंदिर का मुख्य गर्भगृह दक्षिणमुखी हनुमान जी का होगा, जिसका निर्माण शास्त्रानुसार दक्षिण दिशा में 13×11 माप के अनुसार किया जा रहा है। इसके साथ ही राम दरबार एवं राधे-कृष्ण मंदिर भी निर्मित होंगे, जिनके गर्भगृह का आकार 9×5 रखा गया है।
मुख्य गर्भगृह की ऊँचाई लगभग 51 फीट तथा राम दरबार एवं राधे-कृष्ण मंदिर की ऊँचाई लगभग 41 फीट निर्धारित की गई है। मंदिर परिसर में विशाल रंग मंडप, तीन श्रृंगार चौकी एवं तीन कोली मंडप का भी निर्माण होगा। यह सम्पूर्ण निर्माण कार्य शिल्प शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा के नियमों का पालन करते हुए किया जा रहा है, जिसमें दिशा, आय-व्यय, गण, नक्षत्र एवं राशि आदि का विशेष ध्यान रखा गया है।
आज मंदिर परिसर में नींव खुदाई का पवित्र कार्य विधिवत रूप से प्रारंभ किया गया। इस शुभ अवसर पर शिल्पी मुकेश शर्मा द्वारा ग्रामवासियों की उपस्थिति में नाग चक्र विधि से संपूर्ण नगर एवं जन-जन की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजन संपन्न किया गया। यह संपूर्ण अनुष्ठान नाग चक्र शास्त्र के अनुसार विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ।




