CBSE थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर SC की सुनवाई, 9वीं छात्रों को राहत
CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई है। इस दौरान 9वीं कक्षा के छात्रों को बड़ी राहत मिलने की बात सामने आई। सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि तीसरी भाषा में जरूरी स्तर हासिल नहीं करने पर भी छात्र को 10वीं कक्षा में जाने से नहीं रोका जाएगा।
दरअसल, CBSE ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया है। इनमें दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। इस नीति को 1 जुलाई से लागू किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि सत्र शुरू होने के बाद अचानक नई नीति लागू होने से छात्रों और स्कूलों के सामने कई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के स्कूलों में नई भाषाओं के लिए पर्याप्त शिक्षक और किताबें उपलब्ध नहीं होने की समस्या बताई गई।
सुनवाई के दौरान CJI ने भी सवाल उठाया कि अगर बोर्ड नई भाषा लागू कर रहा है, तो उसे पढ़ाने के लिए जरूरी शिक्षक उपलब्ध कराना भी उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई।
सरकार की ओर से बताया गया कि तीसरी भाषा के लिए इंटरनल असेसमेंट होगा। इसमें छात्र के जरूरी स्तर तक नहीं पहुंचने पर भी उसे 10वीं कक्षा में जाने से नहीं रोका जाएगा। यानी फिलहाल 9वीं के छात्रों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि तीसरी भाषा की वजह से उनका साल नहीं रुकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि अलग-अलग क्षेत्रों के छात्रों को दूसरी भारतीय भाषाएं सीखने का अवसर मिलना उपयोगी हो सकता है, लेकिन नीति को लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान कोर्ट CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। फिलहाल



