CBSE ने सोमवार को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
नए निर्देशों के अनुसार, इस वर्ष कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। बोर्ड के इस फैसले से देशभर के करीब 50 लाख छात्र-छात्राओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
नई गाइडलाइन के अनुसार, वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत वे छात्र जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। लेकिन जब ये छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन संबंधित स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों के लिए सत्र 2026-27 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ बोर्ड परीक्षा देंगे। वहीं वर्तमान कक्षा 6 के छात्र पहले ऐसे बैच होंगे, जिन पर नई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पूरी तरह लागू होगी। इन्हें कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और 10वीं बोर्ड में तीसरी भाषा की परीक्षा भी देनी होगी।
CBSE ने दिव्यांग छात्रों को कानून के तहत तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट दी है। इसके अलावा विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और विदेश से भारत लौटने वाले विद्यार्थियों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो छात्र पहले से चुनी गई भाषाओं को जारी रख सकेगा।
गौरतलब है कि CBSE ने 15 मई को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था, जिसके बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने इसका विरोध किया। 19 याचिकाकर्ताओं के समूह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां मामले की सुनवाई जारी है।




