NEP 2020 के तहत क्यों हुआ यह बदलाव?
अगर आपका बच्चा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से पढ़ाई कर रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत CBSE ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए थर्ड लैंग्वेज (तीसरी भाषा) को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। अब छात्रों को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि इस विषय में उत्तीर्ण (पास) होना भी जरूरी होगा। यदि छात्र थर्ड लैंग्वेज में सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें कक्षा 10 का पास सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
यह बदलाव आने वाले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा और इसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
क्या है CBSE का नया नियम?
CBSE ने स्पष्ट किया है कि NEP 2020 के प्रावधानों के अनुरूप अब कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य होगा। पहले कई स्कूलों में थर्ड लैंग्वेज केवल औपचारिक विषय के रूप में पढ़ाई जाती थी, लेकिन अब इसमें पास होना आवश्यक होगा।
बोर्ड का कहना है कि थर्ड लैंग्वेज में असफल रहने वाले छात्रों को कक्षा 10 का पास सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।
किन छात्रों पर लागू होगा नया नियम?
यह नियम CBSE से संबद्ध सभी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों पर लागू होगा। आगामी शैक्षणिक सत्र से स्कूलों को नई व्यवस्था के अनुसार पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रक्रिया अपनानी होगी।
NEP 2020 में क्यों दिया गया है भाषा पर जोर?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी (Multilingual) बनाना है। नीति के अनुसार विद्यार्थी अपनी मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा और अन्य भारतीय भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करें, जिससे उनकी भाषा क्षमता, संचार कौशल और सांस्कृतिक समझ बेहतर हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान बच्चों की सीखने की क्षमता, रचनात्मकता और तार्किक सोच को मजबूत करता है।
पास सर्टिफिकेट के लिए क्या करना होगा?
अब छात्रों को कक्षा 10 का पास प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए सभी अनिवार्य विषयों के साथ-साथ थर्ड लैंग्वेज में भी निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करने होंगे।
यदि कोई छात्र तीसरी भाषा में फेल होता है, तो उसे बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार सुधार परीक्षा (यदि लागू हो) या अन्य प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है।
स्कूलों को भी करनी होगी तैयारी
CBSE के इस फैसले के बाद सभी संबद्ध स्कूलों को अपने भाषा शिक्षकों, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव करने होंगे। साथ ही छात्रों और अभिभावकों को भी नए नियमों की पूरी जानकारी देना स्कूलों की जिम्मेदारी होगी।




