प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऑलमाइटी चिल्ड्रन समर कैंप के तीसरे दिन बच्चों ने उत्साह और आनंद के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। तीसरे दिन की सबसे खास और आकर्षक एक्टिविटी वैल्यू बेस्ड एक्टिविटी “ब्लेसिंग ट्री” रही, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
ब्लेसिंग ट्री बना बच्चों की सकारात्मक सोच का प्रतीक
“Blessing Tree” एक्टिविटी के दौरान बच्चों से पूछा गया कि वे संसार को क्या आशीर्वाद देना चाहते हैं। 200 से अधिक बच्चों ने तीन बड़े पेड़ों पर अपनी शुभकामनाएं लिखकर चिपकाईं। बच्चों ने कामना की कि दुनिया में कोई भी भूखा न सोए, सभी को भरपेट भोजन मिले, हर परिवार में प्रेम बना रहे, सभी स्वस्थ रहें और धरती हमेशा हरी-भरी बनी रहे। बच्चों की इन मासूम दुआओं से सजे ब्लेसिंग ट्री पूरे कैंप का मुख्य आकर्षण बन गए।
ट्रैफिक नियमों की दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बहादुर सिंह गौड़ उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों को यातायात नियमों का महत्व समझाते हुए हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना और तेज गति दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र में बिना लाइसेंस वाहन चलाना कानूनन अपराध बताया। बच्चों ने घर जाकर अपने माता-पिता को भी ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
भारतीय संस्कारों के पीछे छिपा विज्ञान बताया
आज के सत्र का संचालन ब्रह्माकुमारी निकिता दीदी ने किया, जबकि ब्रह्माकुमारी रजनी दीदी भी मौजूद रहीं। निकिता दीदी ने “भारतीय संस्कृति में संस्कारों का वैज्ञानिक रहस्य” विषय पर बच्चों से संवाद करते हुए बताया कि सुबह जल्दी उठना, बड़ों के चरण स्पर्श करना, सूर्य को जल देना, दीपक को देखना और भगवान का ध्यान करना जैसे संस्कारों के पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
उन्होंने बताया कि सुबह की ताजी हवा शरीर को ऊर्जा देती है, बड़ों का आशीर्वाद मानसिक सकारात्मकता बढ़ाता है और मेडिटेशन से तनाव कम होकर मन शांत रहता है। वैज्ञानिक तथ्यों के साथ भारतीय परंपराओं की जानकारी मिलने से बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना और मजबूत हुई।
क्रिएटिव मेडिटेशन से बच्चों ने महसूस की सकारात्मक ऊर्जा
कैंप के दौरान बच्चों के लिए क्रिएटिव मेडिटेशन सेशन भी आयोजित किया गया। इसमें बच्चों को अनुभव कराया गया कि भगवान उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं और सकारात्मक ऊर्जा उनके जीवन को बेहतर बना रही है। बच्चों ने आंखें बंद कर गहराई से शांति और आत्मविश्वास का अनुभव किया।




