Bundi जिले के लिए गौरव का एक खास क्षण सामने आया है। कोटा विश्वविद्यालय से जुड़ी योग शिक्षिका और असिस्टेंट प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) Renu Kushwah का महत्वपूर्ण शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित जर्नल ‘अंतर्राष्ट्रीय योगिक, मानव आंदोलन एवं खेल विज्ञान जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है।
यह शोध “सूर्य नमस्कार और शवासन का विश्वविद्यालयी छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य मापदण्डों पर प्रभाव” विषय पर आधारित है, जिसमें योग की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना था कि नियमित योग अभ्यास छात्रों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस पर कितना प्रभाव डालता है।
शोध के तहत कुल 60 विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जिन्हें लगातार 6 सप्ताह तक योग अभ्यास कराया गया। इसमें सूर्य नमस्कार के विभिन्न राउंड के साथ अंत में शवासन को शामिल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान छात्रों की शारीरिक स्थिति और प्रदर्शन का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया गया।
परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। अध्ययन में पाया गया कि नियमित अभ्यास से छात्रों के लचीलेपन, सहनशक्ति, गति, संतुलन और विशेष रूप से उदर शक्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। आंकड़ों के अनुसार, उदर शक्ति में करीब 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लचीलेपन में भी स्पष्ट सुधार देखने को मिला। सांख्यिकीय विश्लेषण (ANCOVA) के जरिए इन निष्कर्षों को वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।
रेनू कुशवाह ने बताया कि यह शोध केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि आमजन, महिलाओं और युवाओं के लिए भी बेहद उपयोगी है। उनका कहना है कि प्रतिदिन मात्र 15 से 20 मिनट सूर्य नमस्कार और शवासन का अभ्यास व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पति यदुनंदन सिंह, गुरुजनों और सहयोगियों को दिया। साथ ही भविष्य में योग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में और गहन शोध करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
यह उपलब्धि न केवल बूंदी जिले बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का विषय है, जो यह दर्शाती है कि योग जैसे पारंपरिक अभ्यास को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी प्रमाणित किया जा सकता है।




