प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय ब्रह्माकुमारीज केंद्र, कुएं वाली गली में “क्षमा भाव द्वारा आत्मिक उन्नति” विषय पर एक प्रेरणादायक एवं भावनात्मक क्रिएटिव मेडिटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी भाई-बहनों को क्षमा के आध्यात्मिक महत्व और उसके जीवन पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया।
ब्रह्माकुमारी निकिता बहन ने सरल एवं सहज तरीके से समझाया कि मेडिटेशन और क्षमा भाव के माध्यम से आत्मा पर लगे नकारात्मक संस्कारों और पापों के प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्षमा केवल दूसरों को मुक्त करना नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से शांत, हल्का और शुद्ध बनाना है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे सोने का गिलास यदि अंदर से गंदा हो तो उसका उपयोग ठीक नहीं माना जाता, वैसे ही आत्मा को भी विकारों से मुक्त करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में उन्होंने नौ ग्रहों के प्रभाव और उनके मानव जीवन से संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रह का संबंध पिता से और चंद्र ग्रह का संबंध माता व मनोबल से होता है।
उन्होंने कहा कि कमजोर सूर्य ग्रह से तनाव, अवसाद, शारीरिक समस्याएं और अस्थिरता जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जबकि इसका समाधान अपने पिता और पूर्वजों के प्रति क्षमा भाव रखने से संभव है।
इसी प्रकार चंद्र ग्रह कमजोर होने पर व्यक्ति भय, भ्रम और अस्थिर मन का शिकार हो जाता है, जबकि माता के प्रति सच्चे क्षमा भाव से मनोबल मजबूत होता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी साधकों को अपने माता-पिता एवं प्रियजनों से मन ही मन क्षमा मांगने का अभ्यास कराया गया। इस दौरान पूरा वातावरण अत्यंत शांत, भावुक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया तथा प्रतिभागियों ने गहरा आत्मिक अनुभव प्राप्त किया।




