बूंदी के आजाद पार्क में रामलीला का शुभारंभ, पहले दिन नारद मोह और रावण अवतार का मंचन
शहर के ऐतिहासिक आजाद पार्क में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर रामलीला मंचन का भव्य शुभारंभ हुआ। धर्म, संस्कृति और भक्ति से जुड़े इस आयोजन में शहर के गणमान्य नागरिकों और रामभक्तों ने भाग लिया। रामलीला की शुरुआत के साथ ही आयोजन स्थल पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद किया।
रामलीला का आयोजन दशहरा महोत्सव समिति की ओर से किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य लोगों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ना और भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है। रामलीला के मंचन के माध्यम से दर्शकों को भगवान श्रीराम के जीवन, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म से जुड़े प्रसंग देखने का अवसर मिलेगा।
सभापति भरत शर्मा रहे मुख्य अतिथि
रामलीला के उद्घाटन समारोह में नगर परिषद सभापति भरत शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर अध्यक्ष राजकुमार श्रंगी ने की। अतिथियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर रामलीला मंचन का औपचारिक शुभारंभ किया।
इसके बाद सभी अतिथियों ने विधि-विधान से रामायण और भगवान गजानन की आरती की। पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की मंगलमय शुरुआत की गई। आयोजन में मौजूद लोगों ने धार्मिक कार्यक्रम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
शारदीय नवरात्र के दौरान रामलीला मंचन का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों देश के अलग-अलग क्षेत्रों में रामायण से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जाता है। इसके माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को लोगों तक पहुंचाया जाता है।
दशहरा महोत्सव समिति के अध्यक्ष ने किया स्वागत
दशहरा महोत्सव समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह राजावत ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का स्वागत करते हुए समिति की ओर से आयोजित किए जाने वाले आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की।
उन्होंने लोगों से रामलीला मंचन में बढ़-चढ़कर भाग लेने और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की। इस तरह के आयोजन शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ ही लोगों को एक मंच पर जोड़ने का अवसर भी देते हैं।
पहले दिन नारद मोह और रावण अवतार का मंचन
रामलीला के पहले दिन कलाकारों ने ‘नारद मोह’ और ‘रावण अवतार’ के प्रसंगों का मंचन किया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से इन प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। दर्शकों ने मंचन को ध्यानपूर्वक देखा और कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
रामायण से जुड़े ये प्रसंग कथा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नारद मोह के प्रसंग में मोह और अहंकार से जुड़े भावों को दिखाया जाता है, जबकि रावण अवतार के प्रसंग से रामायण की आगे की कथा की पृष्ठभूमि तैयार होती है।



