बूंदी में अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ (एकीकृत) के बैनर तले सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन की संभाग अध्यक्ष सुमन जैन के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही मुख्यमंत्री के नाम भी मांग पत्र प्रेषित किया गया।
कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में भीषण गर्मी और लू को देखते हुए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की सुरक्षा के लिए 30 जून तक आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने की मांग की। उनका कहना था कि छोटे बच्चों को लू और बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी है।
संगठन ने महिला अधिकारिता विभाग की ‘उड़ान योजना’ का कार्य करने से भी इंकार कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके मूल कार्यों में पोषाहार वितरण, टीकाकरण, वृद्धि निगरानी और प्री-स्कूल शिक्षा शामिल हैं, लेकिन उनसे लगातार अन्य विभागों के अतिरिक्त कार्य भी करवाए जा रहे हैं। अब ‘राजसिम्स एप’ के माध्यम से उड़ान योजना का ऑनलाइन कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे उन्होंने मानसिक शोषण करार दिया।
ज्ञापन में विभिन्न परियोजनाओं में लंबे समय से लंबित मानदेय भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन के अनुसार बूंदी जिले के कर्मचारियों का मार्च और अप्रैल 2026 का राज्य सरकार का मानदेय बकाया है। कई परियोजनाओं में केंद्र सरकार का मानदेय भी महीनों से लंबित चल रहा है। इसके अलावा पोषण ट्रैकर इंसेंटिव, पीएमएमवीवाई इंसेंटिव और बिजली बिल पुनर्भरण जैसी राशि भी नहीं मिलने की शिकायत की गई।
संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे ज्ञापन में आगामी पूर्व प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अनुभवी आंगनबाड़ी कर्मियों को बोनस अंक देकर प्राथमिकता देने और सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी योजना को तत्काल लागू करने की मांग की।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
इस दौरान प्रवीणा कंवर, संतोष देवी, सोनु शर्मा, राजेश कुमारी, सुशीला शर्मा, सावित्री मीणा, हेमलता शर्मा, अर्चना कुमावत, दिनेश बाई, सुमन जांगिड़, नंदा बाई, विमला मीणा, द्वारिका बाई और प्रभा रानी शर्मा सहित बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मौजूद रहीं।




