बूंदी की 785वीं वर्षगांठ पर विरासत संरक्षण विषयक कार्यशाला आयोजित
छोटी काशी बूंदी की स्थापना की 785वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) चैप्टर बूंदी के तत्वावधान में "हमारी विरासत और हम" विषय पर सामान्य चिकित्सालय बूंदी के राजकीय एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष की प्रशिक्षु एएनएम छात्राओं के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बूंदी की विरासत एवं संस्कृति से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमुख चिकित्सा अधिकारी लक्ष्मीनारायण मीणा रहे, जबकि अध्यक्षता चैप्टर संयोजक राजकुमार दाधीच ने की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजकुमार दाधीच ने कहा कि बूंदी राजस्थान के सबसे प्राचीन और गौरवशाली शहरों में से एक है, जिसकी ऐतिहासिक विरासत 785 वर्षों बाद भी अपनी पहचान बनाए हुए है। भारतीय सांस्कृतिक निधि द्वारा बूंदी की कला, संस्कृति, भाषा और साहित्य के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन समय-समय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित कर धरोहर संरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार कर सरकार तक पहुंचाता है। चैप्टर सह-संयोजक राजेंद्र कुमार भारद्वाज ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मीनाथ मंदिर के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में इंटेक सदस्य जे.पी. त्रिपाठी, अशोक शर्मा तलवास सहित अन्य वक्ताओं ने भी बूंदी की समृद्ध विरासत पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रशिक्षु छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मुख्य अतिथि लक्ष्मीनारायण मीणा ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी देश की महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में पिंकी प्रजापत, कृष्णा कुमारी सैनी, यशवंत सेन, हेमलता लोधा, सलोनी जादौन एवं जयश्री गौतम सहित कई प्रतिभागियों ने पुरस्कार प्राप्त किए।




